Sitamarhi Paddy Monsoon: देर से ही सही, लेकिन जिले में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही किसानों के चेहरे पर एक बार फिर उम्मीद की चमक लौट आयी है. पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और झुलसाने वाली धूप के बीच बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे अन्नदाता अब पूरी ताकत से अपने खेतों की ओर रुख कर चुके हैं. जिले में हुई हल्की बारिश के बाद धान की रोपनी के कार्य में काफी तेजी आ गयी है. इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों के खेतों में किसानों और मजदूरों की चहल-पहल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गयी है.
बिचड़ा तैयार होने के बाद भी बारिश न होने से थमी थी रफ्तार
जिले के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में सुबह से ही किसान पारंपरिक गीतों के बीच धान की रोपनी में जुटे नजर आ रहे हैं. स्थानीय किसानों का कहना है कि खेतों में धान का बिचड़ा (पौध) पूरी तरह तैयार होने के बावजूद समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपनी का मुख्य काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा था. करीब एक सप्ताह से आसमान में काले बादलों की आवाजाही तो लगातार बनी हुई थी, लेकिन उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं बरस रहा था. कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन उससे खेतों की सिंचाई की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही थी.
डीजल की महंगाई से परेशान थे किसान, बारिश ने दिलाई बड़ी राहत
स्थानीय प्रगतिशील किसान हरिकिशोर सिंह, राम एकवाल राय, अशर्फी सिंह व राजीव सिंह ने बताया कि समय पर मानसून न आने से रोपनी में काफी देरी हो रही थी. खेतों में नमी की भारी कमी के कारण किसान चाहकर भी धान की रोपनी शुरू नहीं कर पा रहे थे. वहीं, डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण पंपसेट से खेतों की सिंचाई कराना भी गरीब किसानों के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा था. ऐसे में अधिकांश किसान अच्छी प्राकृतिक बारिश का इंतजार कर रहे थे. पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर हुई हल्की बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है. खेतों में नमी आने के बाद किसानों ने निजी पंपसेट व मोटर पंप के सहारे खेतों को कादो कर तैयार करना शुरू कर दिया है.
मौसम विभाग ने जताई अच्छी बारिश की संभावना
अब बड़ी संख्या में किसान स्थानीय मजदूरों के साथ सुबह से शाम तक धान की रोपनी में जुट गये हैं. खेतों में रोपनी करती किसानों व मजदूरों की टोली खरीफ सीजन की रफ्तार बढ़ने का साफ संकेत दे रही है. कृषि मौसम वैज्ञानिकों ने भी अगले दो-से तीन दिनों में जिले के विभिन्न हिस्सों में अच्छी बारिश होने की प्रबल संभावना जतायी है. यदि मानसून की सक्रियता इसी तरह अनुकूल बनी रही, तो धान की रोपनी का कार्य और तेज होने की पूरी उम्मीद है. फिलहाल मौसम का यह बदला मिजाज खेती-किसानी के लिए संजीवनी लेकर आया है.
