सीतामढ़ी नगर निगम: शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे नगर निगम की जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं. नगर निगम द्वारा शहर की सफाई, नाला उड़ाही और डोर-टू-डोर कचरा उठाव पर हर महीने करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है. इसके बावजूद जिला मुख्यालय के अति-विशिष्ट (वीआईपी) क्षेत्र में ही सफाई व्यवस्था की स्थिति नारकीय बनी हुई है.
मुख्य सड़क चकाचक, गलियों में सड़ांध और कचरे का ढेर
वार्ड संख्या-34 के शंकर चौक से कुमार चौक, डीएम कोठी, सांसद परिसदन और हनुमान मंदिर चौक तक का मुख्य मार्ग तो साफ दिखता है, लेकिन पीछे की गलियों में कदम रखते ही बदहाली उजागर हो जाती है:
- सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के आवास के ठीक पीछे वाली गली के नाले महीनों से कचरे से पटे पड़े हैं.
- नालों के भीतर और किनारों पर लंबे-लंबे घास व झाड़ियां उग आई हैं, जिससे जल निकासी पूरी तरह ठप है.
- चिल्ड्रेन पार्क की चहारदीवारी से सटे मुख्य रास्ते को अघोषित डंपिंग स्थल बना दिया गया है.
- कचरे से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण राहगीरों का चलना और आसपास के दुकानदारों का बैठना दूभर हो गया है.
जनता के टैक्स की बर्बादी पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल
डुमरा प्रखंड बीस-सूत्री समिति अध्यक्ष सह भाजपा मंडल अध्यक्ष गगनदेव कुमार ने रोष जताते हुए कहा कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सफाई नहीं होना निगम की बड़ी लापरवाही है. कई बार शिकायतों के बाद भी अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं. इस बाबत स्वच्छता पदाधिकारी आशीष कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.
सात करोड़ से नाले व सड़क का निर्माण जल्द
गगनदेव कुमार ने बताया कि सांसद आवास के पीछे वाली लेन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब सात करोड़ रुपये की लागत से बड़े नाले और पीसीसी सड़क निर्माण का टेंडर हो चुका है. इसका निर्माण बुडको द्वारा जल्द कराया जाएगा.
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