तापमान में गिरावट होने से तीन गुणा से अधिक बढ़ा वायु प्रदुषण

विगत सप्ताह गुरुवार की शाम से लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड, कुहासा व शीतलहर के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

सीतामढ़ी/पुपरी. विगत सप्ताह गुरुवार की शाम से लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड, कुहासा व शीतलहर के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. तापमान में आई गिरावट के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दुकानों और चौराहों पर रौनक कम होने से व्यापार भी प्रभावित हुआ है. कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग अलाव और हीटर का सहारा लेते नजर आए. जहां-तहां लोग आग तापते हुए समय व्यतीत कर रहे हैं ताकि सर्दी से राहत मिल सके. बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से विशेष दिक्कतें हो रही हैं. भीषण ठंड के कारण वायु भी प्रदुषित हो रही है. जिले का हवा गुणवत्ता सूचकांक(एक्यूआई) तीन गुणा अधिक बढ़ गया है. वहीं ठंड से कई फसलों पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है.

–फसलों के नुकसान की संभावना भी बढ़ी

कृषि विज्ञान केंद्र बलहा मकसूदन सीतामढ़ी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ राम ईश्वर प्रसाद एवं सभी साथी वैज्ञानिक दल ने सीतामढ़ी में भी बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त किया है. वहीं तापमान में आये गिरावट पर विभिन्न फसलों पर होने वाले नुकसान पर किसानों को आवश्यक सलाह दिया है. कहा कि विश्व में वायु प्रदुषण सूचकांक 50 बेहतर माना जाता है. लेकिन विभिन्न महानगरों में यह सूचकांक 300 के आसपास हो गया है. जो मानव स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह है. सीतामढ़ी जिले में भी यह सूचकांक वर्तमान में 180 के आसपास हो गया है. जो सामान्य से तीन गुणा से भी अधिक है. इस कारण वैसे मनुष्य जो हृदय से संबंधित समस्याओं से प्रभावित हैं, वृद्ध व्यक्ति एवं बच्चे को संयमित से रहने की जरूरत है. जब भी बाहर निकलें तो मास्क का प्रयोग बेहतर माना जाता है. कहां यह भी देखा जा रहा है कि प्रदूषण कणिकाएं जिसका स्तर 2.5 एम होना चाहिए वह भी पंद्रह से बीस गुणा अधिक हो गया है. वैज्ञानिक दल ने बताया कि उपरोक्त समस्या का प्रमुख कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या में वृद्धि, फैक्ट्री, खेतों में अंधाधुंध रसायन का प्रयोग, इत्यादि है. वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ राम ईश्वर प्रसाद एवं साथी वैज्ञानिक ने बताया कि विगत 10 दिनों में जिले के तापमान में भी काफी गिरावट आई है. जिससे फसल के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. विशेषकर आलू एवं टमाटर में झूलसा की संभावना आ सकती है. लेकिन गेहूं, फूलगोभी, पत्तगोभी इत्यादि को नुकसान की संभावना नहीं है. आलू में अगेती झूलसा को बचाने हेतु मेटालेक्सील और अगर पछेती झूलसा के आने की संभावना दिख रही हो तो हेक्साकोनाज़ोल अथवा रिडोमिल का छिड़काव करना लाभदायक होगा. उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने जिले के किसानों को सलाह दिया है कि आम के बगीचे में गर्मी प्रदान करने हेतु एवं फफूंद से बचने हेतु सलफर का छिड़काव आवश्यक है. प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम सलफर का घोल तैयार कर छिड़काव करने से मंजर बेहतर निकलता है. यह छिड़काव 15 जनवरी तक अवश्य कर दें.

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Author: VINAY PANDEY

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