आज भी जीवंत है समाज सुधारक पुस्कालय, गांव के बुजुर्ग करते हैं संचालन

ग्रामीणों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से पुस्तकालय की स्थापना की गई है, जहां बैठक कर बड़ी संख्या में लोग विभिन्न साहित्य व धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करते हैं.

रीगा. ग्रामीणों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से पुस्तकालय की स्थापना की गई है, जहां बैठक कर बड़ी संख्या में लोग विभिन्न साहित्य व धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करते हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि आपसी सहयोग से इस संस्था को स्थापित किया गया है. पूर्व में विभिन्न गांवों में इस प्रकार की व्यवस्था थी जो धीरे-धीरे समाप्त हो गयी है. प्रखंड क्षेत्र में 64 गांव है, जिसमें सिर्फ रेवासी पकड़ी एक ऐसा गांव है, जहां अब भी श्री समाज सुधारक पुस्तकालय का संचालन हो रहा है. पूर्व विधान पार्षद सह सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने वर्ष 2022 में इसका शुभारंभ किया. इस पुस्तकालय में 1218 पुस्तक अब भी उपलब्ध हैं. पुस्तकालय के अध्यक्ष नमो नाथ झा ने बताया कि फिलहाल दो सौ से अधिक प्रारंभिक सदस्य हैं. सभी सदस्य माहवारी निर्धारित राशि जमा करते हैं. पुस्तकालय के माध्यम से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को कंप्यूटर के ज्ञान के अलावा किताबी ज्ञान भी मुफ्त में दी जा रही है. समाज सुधारक पुस्तकालय के अध्यक्ष नमो नाथ झा ने बताया कि पुस्तकालय के संचालन में गांव के सभी अवकाश प्राप्त लोगों के अलावे ग्रामीण बुजुर्गों का योगदान है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1960 में ग्रामीण जनार्दन झा ने पुस्तकालय के लिए जमीन दी थी. पकड़ी गांव में लोग इधर-उधर समय बर्बाद न करके सभी पुस्तकालय पर आकर अखबार एवं पुस्तक पढ़ते हैं. अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले दिनों में यह पुस्तकालय बिहार में स्थान प्राप्त करेगा.

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Author: RANJEET THAKUR

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