नये हाई स्कूलों के लिए भूमि की तलाश सीतामढ़ी : राज्य सरकार की कोशिश है कि हर पंचायत में कम से कम एक हाई स्कूल हो. इसके लिए विगत कई माह से सरकार व जिला प्रशासन के स्तर से कोशिश की भी जा रही है. सबसे बड़ी समस्या भूमि की उपलब्धता का है. यानी एक हाई स्कूल के लिए जितनी भूमि की जरूरत है, उतनी मिल नहीं रही है. वहीं भू-दाता भी सामने नहीं आ रहे हैं. इसी कारण प्रशासन थोड़ा चिंतित है. — एक से डेढ़ एकड़ की जरूरत हाल में शिक्षा विभाग के अपर सचिव के सेंथिल कुमार ने डीइओ व सर्वशिक्षा अभियान के डीपीओ को पत्र भेज एमएसडीपी योजना के तहत 30 मध्य विद्यालयों को हाई स्कूल में उत्क्रमित करने का प्रस्ताव भेजने को कहा है. पत्र में कहा गया है कि हाई स्कूल के लिए एक से डेढ़ एकड़ भूमि की जरूरत है. इसके अलावा 40 डिसमिल खाली भूमि चाहिए ताकि बाद में हाई स्कूल को विकसित करने के दौरान भूमि की समस्या उत्पन्न न हो. राज्यपाल के नाम से भूमि का निबंधन होना जरूरी है. — भूमिदाता का होगा नामाकरण अपर सचिव श्री कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक के लिए कम से कम एक एकड़ या उससे अधिक की भूमि दान करने वाले दाता या उनके इच्छित के नाम पर स्कूल का नाम रखा जायेगा. अगर कोई एक एकड़ से कम भूमि उपलब्ध कराता है तो वैसे दाता या उनके इच्छित व्यक्ति का नाम स्कूल के मुख्य द्वार पर शिलापट्ट पर लिखवाया जायेगा. अपर सचिव के अनुसार भूमिदाता के संबंध में किसी भी तरह के विवाद का निबटारा डीइओ करेंगे. नामाकरण के विवाद का निदान डीएम करेंगे. डीएम के निर्णय से असंतुष्ट व्यक्ति विभागीय प्रधान सचिव के यहां अपील दायर कर सकते हैं. — तीन सदस्यीय कमेटी बनीनये उत्क्रमित होने वाले हाई स्कूलों के लिए भूमि की समस्या से निबटने के लिए डीएम द्वारा पंचायत स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. यह कमेटी भूमि उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी. कमेटी में पंचायत के राजस्व कर्मचारी अध्यक्ष होंगे तो संबंधित मध्य विद्यालय के प्रधान शिक्षक व गणित शिक्षक सदस्य बनाये गये हैं. — क्या है कमेटी का दायित्व कमेटी में शामिल राजस्व कर्मचारी व प्रधान शिक्षक प्रस्तावित मध्य विद्यालय के नाम से जितनी भूमि का दस्तावेज उपलब्ध है, उसके आधार पर भूमि की लंबाई व चौड़ाई को मीटर में मापी करेंगे. मापी के लिए अमीन का होना आवश्यक नहीं है, बल्कि गणित शिक्षक के सहयोग से यह काम करना है. बाद में प्रतिवेदन भेजना है. मध्य विद्यालय में एक एकड़ से कम भूमि होने पर राजस्व कर्मचारी विद्यालय से सटे सरकारी भूमि का चिह्नित करेंगे. सरकारी भूमि नहीं होने पर रैयती भूमि के भू-धारी से कम से कम एक एकड़ भूमि को दान देने के लिए प्रेरित करेंगे. प्रस्तावित हाई स्कूल के भवन निर्माण के लिए परती भूमि उपलब्ध है, लेकिन भवन निर्माण के लिए कम पड़ रहा है तो बगल में सरकारी जमीन हो तो उसका उपयोग किया जा सकता है. सरकारी भूमि नहीं होने पर भू-दाता को भूमि देने के लिए प्रेरित करना है.
नये हाई स्कूलों के लिए भूमि की तलाश
नये हाई स्कूलों के लिए भूमि की तलाश सीतामढ़ी : राज्य सरकार की कोशिश है कि हर पंचायत में कम से कम एक हाई स्कूल हो. इसके लिए विगत कई माह से सरकार व जिला प्रशासन के स्तर से कोशिश की भी जा रही है. सबसे बड़ी समस्या भूमि की उपलब्धता का है. यानी एक […]
