कर्ज भी चुकता नहीं किया और जल गया 36 हजार अग्निपीड़ितों का दर्द सुन पिघल जा रहा है पत्थर दिल भी बैरगनिया. प्रखंड के मसहां आलम गांव के अग्निपीड़ितों का बुरा हाल है. कई परिवार ऐसे हैं जो घटना के बाद से दाने-दाने के मोहताज हो गए हैं. हालांकि यहां के ग्रामीण संवेदनशील होने के साथ ही इनसानियत का परिचय दे रहे हैं. ग्रामीणों की ही देन है कि अब तक कोई पीड़ित भूखे नही मरा है. पीड़ित सुंदरी देवी ने बताया कि पंजाब से मजदूरी कर बेटा 36 हजार रुपये कमा कर लाया था. कर्ज चुकता करना था लेकिन आग लगने से सब कुछ जल कर खाक हो गया. दो वक्त की रोटी पर आफत पीड़ित फुलिया देवी ने कहा कि रोज की मजदूरी से कुछ-कुछ बचा कर झोपड़ी बनाई थी. वह भी राख हो गया. 3600 रुपये जमा की थी. वह खाक हो गया. घर में अनाज का एक दाना भी नहीं बचा. अब दो वक्त की रोटी पर आफत है. केथरी देवी ने बताया कि तीन माह का वृद्धावस्था पेंशन मिला था. पेंशन का 3600 रुपये भी जल गया. ग्रामीण कर रहे मदद पीड़ित राजीव दास, आनंदी दास व अन्य ने बताया कि ग्रामीणों से मदद मिल रही है. सभी पीड़ित फिलहाल किसी न किसी ग्रामीण के घर में रात गुजार रहे हैं. कल तक अपनी झोंपड़ी में चैन की नींद सोने वाले इन पीड़ितों को देखते ही देखते दूसरे पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
कर्ज भी चुकता नहीं किया और जल गया 36 हजार
कर्ज भी चुकता नहीं किया और जल गया 36 हजार अग्निपीड़ितों का दर्द सुन पिघल जा रहा है पत्थर दिल भी बैरगनिया. प्रखंड के मसहां आलम गांव के अग्निपीड़ितों का बुरा हाल है. कई परिवार ऐसे हैं जो घटना के बाद से दाने-दाने के मोहताज हो गए हैं. हालांकि यहां के ग्रामीण संवेदनशील होने के […]
