दवा है और न डॉक्टर बाहरी दवा लिखते है फोटो नंबर- 4 व 5 पीएचसी व चिकित्सक डॉ फैयाज अहमद बोखड़ा. स्थानीय पीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्था एक मजाक बन कर रह गयी है. चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. 11 पंचायतों के लोगों की चिकित्सा के लिए यह पीएचसी बनाया गया, पर न तो पर्याप्त चिकित्सक है और न ही दवा. सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में भले ही बड़ी-बड़ी बातें कहती है, पर इस पीएचसी की व्यवस्था को देख यह कहने में दो मत नहीं कि कुछ सुधार नहीं हुआ है. यहां तक कि व्यवस्था और बदतर ही हुयी है. दवा का काफी अभाव है. चिकित्सक को मजबूरी है कि पीएचसी में उपलब्ध दवा ही पुरजा पर लिखे. बाहरी दवा पुरजा पर लिखने से रोक है. मरीज की संख्या में कमी कभी इस पीएचसी में प्रतिदिन करीब 200 मरीज आते थे. तब चिकित्सक की संख्या ठीक थी और पर्याप्त दवा भी रहती थी. अब दोनों का अभाव है. यह बात जानने के बाद मरीज पीएचसी में आना कम कर दिये है. चिकित्सा पदाधिकारी डॉ फैयाज अहमद भी इस सच्चाई को स्वीकार करते हैं. कहते हैं कि पूर्व की अपेक्षा अब कम मरीज आते हैं. 200 तो नहीं प्रतिदिन करीब 100 मरीज आते हैं. दवा नहीं दे पाने का दुख डॉ अहमद कहते हैं कि काफी दूर-दूर से मरीज पीएचसी में बड़ी आशा के साथ इलाज कराने आते हैं. यह सोच कर कि नि:शुल्क दवा भी मिल जायेगी. उन्हें भी दु:ख होता है जब मरीजों को दवा नहीं मिल पाती है. दवा की खरीद करने के सवाल पर वे कहते हैं कि जो रेट निर्धारित है, उसके अनुसार, दवा की खरीद संभव नहीं है. हर माह करीब 100 प्रसव डॉ अहमद ने बताया कि पीएचसी में हर माह करीब 100 प्रसव होता है. संसाधन व महिला चिकित्सक की कमी से परेशानी होती है. हद तो यह कि अब तक एनबीसीसी मशीन नहीं मिल सका है. पीएचसी तक आने वाली सड़क में गढ़ा बन गया है. दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. सड़क की मरम्मत कब तक हो पायेगी, यह कहना मुश्किल है. पीएचसी प्रभारी रहते हैं व्यस्त पीएचसी प्रभारी डॉ एजाज अहमद सर्जन है. वे विभागीय कार्यों के अलावा बैठक में आते-जाते हैं. पुपरी,नानपुर व बोखड़ा पीएचसी में ऑपरेशन की जिम्मेवारी डॉ अहमद की हीं है. गत दिन बुधनगरा गांव में एक कुत्ता ने 19 लोगों को काट कर जख्मी कर दिया. सभी पीएचसी में पहुंचे. एंटी रैबिज वैक्सीन नदारद था. डॉ अहमद द्वारा डिमांड किये जाने पर जिला से 15 वैक्सीन भेजा गया. 15 मरीज को वैक्सीन पड़ा और शेष चार को बाहर से खरीद करना पड़ा. सर्पदंश की दवा का भी अभाव है. स्वास्थ्य प्रबंधक अनिल कुमार कहते हैं कि दवा की किल्लत जिला में हीं है. अधिकांश दवा नहीं है.
दवा है और न डॉक्टर बाहरी दवा लिखते है
दवा है और न डॉक्टर बाहरी दवा लिखते है फोटो नंबर- 4 व 5 पीएचसी व चिकित्सक डॉ फैयाज अहमद बोखड़ा. स्थानीय पीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्था एक मजाक बन कर रह गयी है. चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. 11 पंचायतों के लोगों की चिकित्सा के लिए यह पीएचसी […]
