12 वर्ष बाद पता चला शक्षिक की नियुक्ति फर्जी

12 वर्ष बाद पता चला शिक्षक की नियुक्ति फर्जी– वर्ष 2003 में हुआ था अवैध रूप से शिक्षक का नियोजन– नियोजन के समय फर्जी शिक्षक मुकेश का उम्र 18 वर्ष से कम था रून्नीसैदपुर : प्रखंड की मोरसंड पंचायत में शिक्षक नियोजन में गड़बड़ी की हद कर दी गयी. नियोजन के करीब 12 वर्षों बाद […]

12 वर्ष बाद पता चला शिक्षक की नियुक्ति फर्जी– वर्ष 2003 में हुआ था अवैध रूप से शिक्षक का नियोजन– नियोजन के समय फर्जी शिक्षक मुकेश का उम्र 18 वर्ष से कम था रून्नीसैदपुर : प्रखंड की मोरसंड पंचायत में शिक्षक नियोजन में गड़बड़ी की हद कर दी गयी. नियोजन के करीब 12 वर्षों बाद गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. वह यह कि वहां निर्धारित उम्र सीमा नहीं होने के बावजूद एक अभ्यर्थी की पंचायत शिक्षक के रूप में नियुक्ति कर दी गयी थी. खास बात यह कि हाई कोर्ट के आदेश पर शिक्षक नियोजन की निगरानी विभाग के स्तर से जांच शुरू होने के बाद भी उक्त शिक्षक पद से त्याग पत्र नहीं दिया. हालांकि निगरानी विभाग ने उसकी एवं नियोजन इकाई की पूरी कारगुजारी को जांच में पकड़ लिया है. अब यह नियोजन शिक्षक व नियोजन इकाई दोनों के लिए महंगा पड़ रहा है. — क्या है पूरा मामला जांच के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस निरीक्षक विनयानंद पाठक के द्वारा दिये गये आदेश के आलोक में बीइओ, रून्नीसैदपुर ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. प्राथमिकी में मध्य विद्यालय गौरीगामा के नियोजित शिक्षक मुकेश कुमार साह एवं ग्राम पंचायत राज मोरसंड के तत्कालीन नियोजन इकाई को नामजद किया गया है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के सीतामढ़ी कैंप कार्यालय के पत्रांक 66 व दिनांक सात अक्तूबर 15 में पुलिस निरीक्षक विनयानंद पाठक ने बीइओ को लिखा है कि हाई कोर्ट के आदेशानुसार नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की सघन जांच में पाया गया कि नियोजन इकाई, मोरसंड द्वारा उक्त शिक्षक का अवैध तरीके से नियोजन कर दिया गया. नियोजन के समय वर्ष 2003 में उक्त शिक्षक की उम्र 18 वर्ष नहीं थी. बावजूद नियोजन करना संज्ञेय अपराध का मामला बनता है. — आदेश के आलोक में प्राथमिकी पत्र में फर्जी शिक्षक मुकेश कुमार द्वारा अब तक प्राप्त मानदेय की वापसी एवं नियोजन इकाई द्वारा गलत करने की बाबत बीइओ को 24 घंटे के अंदर दोनों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था, जिसके आलोक में नौ अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.

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