फहराये तिरंगा नील गगन में..

स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर कवि गोष्ठी का आयोजन अनुमंडल कार्यालय परिसर के संबोधि कक्ष में किया गया़ अनुमंडलाधिकारी राजेश कुमार ने इसका उद्घाटन किया़ इस अवसर पर अनुमंडलाधिकारी ने कहा कि कवि गोष्ठी का आयोजन करने से यह पता चलता है कि यहां पर साहित्य की क्या स्थिति है़ बड़ी संख्या में आये […]

स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर कवि गोष्ठी का आयोजन अनुमंडल कार्यालय परिसर के संबोधि कक्ष में किया गया़ अनुमंडलाधिकारी राजेश कुमार ने इसका उद्घाटन किया़ इस अवसर पर अनुमंडलाधिकारी ने कहा कि कवि गोष्ठी का आयोजन करने से यह पता चलता है कि यहां पर साहित्य की क्या स्थिति है़ बड़ी संख्या में आये लोगों को देख गद्गद् भाव से कहा कि भविष्य में साहित्यिक कार्यक्रम बड़े स्तर किया जायेगा़

शुरुआत जगजीवन राम द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और दुखित महतो के काव्य पाठ से की गयी. हरिनारायण सिंह हरि की कविता फहराये तिरंगा नील गगन में, मोद भरे हर घर-आंगन में पर लोगों ने खूब तालियां बजायी़
साथ ही युवा कवि अश्विनी कुमार आलोक की कविता परिश्रम की स्वेद बूंद रचती है, मेहनती हाथों की वो रोटी बन जाती है. कवि गोष्ठी में मुरारी प्रसाद शर्मा, दानिश इमाम, अशरफ इमाम, राजेंद्र तिवारी, द्वारिका राय सुबोध, रामजी प्रसाद, अरुण कुमार सिंह, चितरंजन प्रसाद सिंह, फिरोज आलम,
इंतेखाब आलम, जयजाथ ठाकुर, सदानंद सिंह, अजरुन प्रभात, शरदेंदु, लक्ष्मी दास, अब्दुल मोमिन ने अपनी कविताओं ने लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी़

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