फुलवारी व बांसवारी में पढ़ने को विवश हैं बच्चे

डुमरा : खंड के मध्य विद्यालय लौहडीह व मध्य विद्यालय बड़हरवा हिंदी का संचालन मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है. हल्की बारिश होने पर दोनों स्कूलों में बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है. ऐसा प्रधान शिक्षक शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में करते हैं. दोनों स्कूलों की समस्या एक समान है यानी जगह […]

डुमरा : खंड के मध्य विद्यालय लौहडीह व मध्य विद्यालय बड़हरवा हिंदी का संचालन मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है. हल्की बारिश होने पर दोनों स्कूलों में बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है. ऐसा प्रधान शिक्षक शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में करते हैं. दोनों स्कूलों की समस्या एक समान है यानी जगह का अभाव.

मवि, लौहडीह का मामला

बताया गया है कि 10 डिसमिल भू-भाग पर प्राथमिक विद्यालय लौहडीह खोला गया. वर्ष 2010 में इस स्कूल को मध्य विद्यालय में उत्क्रमित कर दिया गया और कक्षा आठ तक की पढ़ाई की व्यवस्था की गयी. जगह के अभाव में बच्चों को एक फुलवारी में पढ़ाया जाता है.

पूर्व से बने दो कक्ष की स्थिति ऐसी है कि उसमें बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता. यानी कक्ष का हाल काफी खस्ता हो गया है. प्रधान शिक्षक संदीप कुमार ने बताया कि इस समस्या से डीइओ को अवगत करा दिया गया है.

मवि बड़हरवा हिंदी का हाल

मवि बड़हरवा हिंदी में चार कमरा है. एक कमरा में कार्यालय है. मात्र तीन कमरे में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. प्रधान शिक्षक आशुतोष कुमार ने बताया कि 530 बच्चे नामांकित है. सभी बच्चों को कक्ष में पढ़ाना मुश्किल है. बांसवारी में स्कूल चलाना पड़ रहा है.

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