डुमरा कोर्ट :प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश वीरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद नाबालिग लड़की के अपहरण मामले में दोषी करार डुमरा थाना क्षेत्र के बेली गांव निवासी दिलीप मिश्रा के पुत्र पंकज कुमार उर्फ पंकज मिश्रा को अलग-अलग दफाओं में सजा सुनायी है.
अपहरण मामले में युवक को 10 वर्ष कारावास
डुमरा कोर्ट :प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश वीरेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद नाबालिग लड़की के अपहरण मामले में दोषी करार डुमरा थाना क्षेत्र के बेली गांव निवासी दिलीप मिश्रा के पुत्र पंकज कुमार उर्फ पंकज मिश्रा को अलग-अलग दफाओं में सजा सुनायी है. […]

सबसे अधिक भादवि की धारा छह (एल) में उसे 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी है. इसके अलावा 10 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है. अर्थदंड की राशि नहीं देने पर एक वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा. वहीं भादवि की धारा 363 में तीन वर्ष सश्रम कारावास व दो हजार अर्थदंड तथा अर्थदंड की राशि नहीं चुकाने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास. भादवि की धारा 366(ए) में पांच वर्ष सश्रम कारावास व 25 हजार अर्थदंड तथा अर्थदंड की राशि नहीं चुकाने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास.
वहीं पॉक्सो एक्ट की धारा चार में सात वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार अर्थदंड तथा अर्थदंड की राशि नहीं देने पर एक वर्ष सश्रम कारावास शामिल है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी. कोर्ट ने फैसले में कहा है कि पीड़िता को दो लाख की सरकारी सहायता राशि देय होगा. जिसमें एक लाख की राशि जिला विधिक प्राधिकार से मिलेगी. वहीं एक लाख की राशि पीड़िता के बैंक खाते में भेजी जायेगी. बालिग होने पर वह उक्त राशि प्राप्त करने की हकदार होगी. वहीं अभियुक्त के जेल में बिताये अवधि का सजा में समायोजन किया जायेगा.
मामले में सरकार पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक जुनैद अर्मिल तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता रामकिशोर सिंह ने बहस की. मालूम हो कि डुमरा थाना क्षेत्र की एक महिला ने पांच फरवरी 2008 को पुत्री के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करायी थी. कहा था कि उसकी पुत्री स्कूल में पढ़ने आयी थी. टेंपो से लौटने के क्रम में उसका अपहरण कर लिया गया.