सीतामढ़ी : जानकी महोत्सव के पावन अवसर पर शहर से सटे जानकी जन्म भूमि पुनौरा धाम में पद्मविभूषण चित्रकुटतुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा आयोजित नौ दिवसीय दिव्य रामकथा के तीसरे दिन की कथा प्रारंभ करने से पूर्व जगद्गुरु ने सीता प्रेक्षागृह में मौजूद सैकड़ों श्रोताओं के अलावा शुभ टीवी चैनल के माध्यम से कथा देख रहे तमाम श्रद्धालुओं का सीता की धरती से अभिनंदन किया.
इसके बाद प्रतिदिन की तरह श्रोताओं को श्री सीताराम नाम युगल मंत्र का संगीतमय जाप कराया. कथा प्रारंभ करने से पूर्व जगद्गुरू ने कथा हॉल में उपस्थित साधु-संतों क्रमश: मुठिया बाबा, मैथिली शरण जी, मदन मोहन शरण, सियाराम शरण व मारुत नंदन समेत अन्य को अपने द्वारा लिखित पहली पुस्तक भेंट किया. सभी साधु-संतों ने जगद्गुरु का पैर छू कर उनसे आशीर्वाद लिया.
26 सितंबर से गया में कथा सुनाएंगे जगद्गुरु : जगद्गुरू ने जानकारी देते हुए कहा कि आगामी 26 सितंबर प्रतिपदा से 2 अक्तूबर सप्तमी तक वे गया में संभवत: गांधी पार्क में रामकथा सुनाएंगे. उक्त रामकथा को आस्था चैनल के माध्यम से पूरे देश-दुनियां में सीधा प्रसारण किया जाएगा. उन्होंने सीतामढ़ी वासियों से गया आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि वहां आपको भोजन व विश्राम समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराया जाएगा.
लक्ष्मणा में सीताराम प्रेम के सभी लक्षण : जगद्गुरू ने तीसरे दिन की कथा को आगे बढ़ाते हुए सीता की आठ सखियों में शामिल लक्ष्मणा की चर्चा की. उन्होंने कहा कि लक्ष्मणा जी सीतामढ़ी में आज भी विराजमान हैं. जगद्गुरु ने एक बार फिर कहा कि सीता का जन्म किसी घड़े से नहीं हुआ था. किसी भी रामायण में इसका वर्णन नहीं मिलता है. जनक जी का हल स्वर्ण सिंहासन से टकराया था, जिस पर सीता जी 16 वर्ष की अवस्था में विराजमान हैं. उनके साथ उनकी आठ सखियां भी सिंहासन के चारों ओर विराजमान हैं, जो सीता जी के साथ ही प्रकट हुई थी. इनका विवाह नहीं हुआ. ये सभी आठ सखियां हमेशा सीता जी के साथ रहती हैं.
लक्ष्मणा जी का होकर रहेगा उद्धार : लक्ष्मणा का अर्थ होता है लक्षण. जिसमें सीताराम जी की भक्ति के सभी लक्षण विराजमान है. यह वही लक्ष्मणा जी हैं. लक्ष्मणा सीतामढ़ी में आज लखनदेई के नाम से जाना जाता है. उन्होंने लक्ष्मणा नदी की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लक्ष्मणा जी का भी उद्धार होकर रहेगा.
परमात्मा में प्रेम ही भक्ति का लक्षण: जगद्गुरु : जगद्गुरू ने कहा कि भक्ति का मुख्य लक्ष्य होता है परमात्मा में परम प्रेम की भक्ति. प्रेम ही भक्ति का लक्षण है और आशक्ति का लक्षण है काम. जगद्गुरू ने कहा कि सबको प्रेम थोड़े ही मिल जाता है. प्रेम के लिए आठ भूमिकाओं को पार करना होता है. जगद्गुरु ने कहा कि हमारे जीवन में आस्तिकता आ जाए तो क्या कहने? आस्तिकता का लक्षण वेद पर विश्वास करना होता है. जो वेद की निंदा करता है उसे नास्तिक कहा जाता है. जगद्गुरू ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान अवतार में बहुत सुंदर लगते हैं. अवतार से पूर्व साकेत में भगवान उतने सुंदर नहीं लगते हैं. भगवान मिथिला में जब दुलहा के रूप में आते हैं तो वे पूरे ब्रह्मांड को मोहित कर लेते हैं. स्वयं लक्ष्मी व लक्ष्मीपति विष्णु भी रामजी पर मोहित हो जाते हैं.
रामचंद्र दुलहा सुहावन लागे, अति मन भावन लागे… : जगद्गुरू ने माता लक्ष्मी द्वारा देवमाता अदिति से भगवान राम की सुंदरता का वर्णन करने वाले प्रसंग को सुनाते हुए ‘माई हे रामचंद्र दुलहा सुहावन लागे, अति मन भावन लागे…’ व ‘राघव दुलहा के आंख भर निहारे सजनी…’ आदि भजन सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को इतना मंत्रमुग्ध कर दिया कि कथा हॉल में बैठे साधु-संत व महिलाएं अपने को रोक नहीं पाए और खड़े होकर नाचने-झूमने लगे. मुठिया बाबा समेत कई साधु-संत काफी देर तक इस भजन पर नाचते-झूमते रहे. सभी भजन के अंदर डूब चुके थे. जगद्गुरू ने कहा कि ये वेद का वचन है कि भगवान अवतार में अति सुंदर लगते हैं. भगवान राम को जो आनंद मिथिला में मिला, वह आनंद भगवान को किसी भी अवतार में नहीं मिला.
वेद पर विश्वास किए बिना भक्ति हो ही नहीं सकती : जगद्गुरु ने कहा कि जब तक वेद के वचन पर विश्वास नहीं करोगे, तब तक भक्ति हो ही नहीं सकती. वेद ने कह दिया है कि गंधवती पृथ्वी ही जिसका स्थान है, उस पर तर्क-वितर्क करना ही बेकार है. सीता जी प्रतिदिन गाय की गोबर से आंगन लीपती हैं. ये वेद का वचन है. ये प्रेम की पहली सीढ़ी है. उसी प्रकार संतों का संग मिल जाए तो गोविंद को पाने से कोई रोक ही नहीं सकता.
मोबाइल छीन लेगा रोजी-रोटी : जगद्गुरू ने जनमानस से सुबह चार बजे उठने की अपील करते हुए कहा कि भजन से क्रिया का ज्ञान हो जाता है. फिर मनुष्य उसी में मग्न हो जाता है. जब भजन में निवृति बढ़ती है तब रुचि जगने लगती है. जिस प्रकार किसी को धन, किसी को पुत्र, किसी को पति, किसी को घर के प्रति आशक्ति हो जाती है. जगद्गुरू ने कहा कि आजकल हमारी आशक्ति अटैची से रह गया है. मोबाइल के दुरुपयोग पर जगद्गुरू ने फिर चेताया और कहा कि मोबाइल हमें रोजी-रोटी नहीं दे रहा है, बल्कि हमसे रोजी-रोटी छीन रहा है.
जिसकी जैसी योग्यता हो, भगवान से जोड़ लेना चाहिए संबंध : ‘आओ मेरी सखियों मेंहदी लगा दो, मुझे श्याम सुंदर से मिलन करा दो’ संगीतमय भजन पर एक बार फिर श्रोता अपने को रोक नहीं पाए.
दर्जनों साधु-संत व महिला-पुरुष श्रोता खड़े होकर तालियों के साथ ताल मिलाते हुए जगद्गुरू के इस भजन पर नाचते-झूमते रहे. जगद्गुरू ने कहा कि भक्ति संबंध पत्र से नहीं होता. साधना करने से होता है. शास्त्र ने पांच भावों की चर्चा की है. जिसकी जैसी योग्यता हो, उसी प्रकार से भगवान से संबंध जोड़ लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनका भगवान के साथ गुरू-शिष्य का संबंध है. उन्होंने कहा कि मेरा एक ही शिष्य है. सारी विद्या उनके लिए ही है. राम जी ही उनकी पेट भर रहे हैं और उनके विक्लांग विश्वविद्यालय में अध्ययनरत करीब 2200 विक्लांगों का पेट भर रहे हैं.
‘ठकुराइन हमरी जनक दुलारी, हम हैं जनक दुलारी के’ : ‘ठाकुर हमरे मिथिला बिहारी, हम हैं मिथिला बिहारी के’, ‘ठकुराइन हमरी जनक दुलारी, हम हैं जनक दुलारी के’ भजन का रसपान कराते हुए जगद्गुरू ने कहा कि जब तक भगवान से संबंध नहीं बनाओगे, तब तक भक्ति नहीं आएगी. संबंध बनाना पड़ता है. भगवान भक्ति का निर्वाह करते हैं, क्योंकि भगवान का शरीर काल के वश में नहीं होता. मनुष्य निर्वाह करना नहीं जानते. श्री रामायण जी की महाआरती के साथ तीसरे दिन की रामकथा का समापन हुआ.
