सब कुछ जानकर भी निकाली गयी निविदा, संभव है कार्रवाई
जिप अध्यक्ष ने मामले से डीएम, डीडीसी व प्रधान सचिव को अवगत कराया
सीतामढ़ी : बैरगनिया में जिला परिषद् की जमीन पर गैरकानूनी ढंग से सामुदायिक अस्पताल के निर्माण का मामला ठंडा नहीं हुआ था कि नगर पंचायत, बैरगनिया की कार्यपालक पदाधिकारी मीरा कुमारी ने अस्पताल परिसर में कुछ और काम कराने को निविदा निकाल कर एक नये विवाद को जन्म दे दी है.
हालांकि डीडीसी के हस्तक्षेप के बाद निविदा पर आगे की कार्रवाई रोक दी गयी है. खास बात यह कि जिला परिषद की जमीन पर नगर निकाय का कोई अधिकार नहीं है. यह जानते हुए भी निविदा निकाली गयी. इससे सरकारी राजस्व की क्षति पहुंची है. इसी कारण कार्रवाई होने की भी बात कही जा रही है. वैसे जिप अध्यक्ष उमा देवी ने डीडीसी से गैरकानूनी ढंग से निविदा निकाले जाने के मामले में क़ानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है.
तब जिला परिषद् रहा खामोश !
वर्षो पूर्व जिप की जमीन पर अस्पताल का निर्माण कराया गया. उस दौरान कतिपय कारणों से जिला परिषद चुप्पी साध लिया था. अगर उसी दौरान रोक लगायी जाती तो यह समस्या आगे नहीं बढ़ती. जिप के द्वारा अस्पताल के निर्माण पर रोक के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया, यह बात आज भी लोगों की समझ में नहीं आ रहा है. अस्पताल परिसर में जिप की कुछ जमीन बची है. इस बावत अध्यक्ष ने डीडीसी को बताया है कि अगर ताजा निविदा की कार्रवाई पर रोक नहीं लगायी गयी तो जिप के हाथ से एक बहुमूल्य जमीन निकल जायेगी.
जिप की जमीन जिप की ही:
बताया गया है कि हाइकोर्ट ने दायर वाद 4444/05 में आदेश जारी किया था, जिसके आलोक में पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग के आदेश पर पंचायती राज विभाग ने 25 जुलाई 06 को पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि नगर निकाय क्षेत्र में जिप की जमीन है तो उसपर नगर निकाय दावा नहीं कर सकता. पंचायती राज विभाग ने तीन नवंबर 2006 को एवं नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने चार अगस्त 15 को पत्र निकाल उक्त बात को स्पष्ट कर दिया था.
स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग
बताया गया है कि अस्पताल बन जाने के बाद जिप की नींद की खुली. तब जिप ने जमीन के एवज में स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की. सिविल सर्जन ने जिप को यह बताने को कहा है कि मुआवजे की राशि कितनी होगी. जब तक मुआवजा मिल नहीं जाता है, तबतक उक्त जमीन जिप की ही कही जायेगी. यह बड़ी बात है कि अस्पताल बनाने के लिए जिप या नगर पंचायत द्वारा जिप से कोई एनओसी नहीं लिया गया था. एक गलती के बाद फिर नगर पंचायत द्वारा दूसरी गलती की जा रही थी. यानी जिप से बिना पूछे उसके जमीन पर काम कराने की योजना बना ली गयी.
अधिकारी का है कहना
वरीय अधिकारी के आदेश पर निविदा के आलोक में आगे की कार्रवाई रोक दी गयी है. जिप से बिना एनओसी लिए ही कार्य कराने की योजना बनायी गयी थी. कारण कि जनप्रतिनिधिगण व अन्य के द्वारा कार्य कराने की बात कही गयी थी.
मीरा कुमारी, कार्यपालक पदाधिकारी
कहतीं है जिप अध्यक्ष
निविदा पर रोक लगाने के लिए डीडीसी को पत्र लिखा गया था. रोक लगने की उन्हें अबतक खबर नहीं मिली है. स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की गयी है. जहां तक बात गैरकानूनी ढंग से अस्पताल बना लिए जाने की है तो इसका जवाब बोर्ड के पूर्व के लोग देंगे.
उमा देवी, जिला परिषद अध्यक्ष
