सीतामढ़ी : होली की समाप्ति के साथ ही परदेस से पर्व में शामिल होने आये परदेसी पुन: वापस जाने लगे हैं. दूसरे राज्यों में जाने के लिए सबसे सुविधाजनक रेलगाड़ी ही रहती है, लेकिन लंबी दूरी की गाड़ियों की कमी के कारण अन्य राज्यों तथा शहरों में काम पर लौटने में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. हालांकि रेलवे द्वारा स्पेशल गाड़ियां भी दी जाती है मगर पर्व के सीजन में भीड़ की तुलना में ट्रेनों की संख्या कम प्रतित होती है.
रेलयात्री जान जोखिम में डाल करते हैं यात्रा
सीतामढ़ी : होली की समाप्ति के साथ ही परदेस से पर्व में शामिल होने आये परदेसी पुन: वापस जाने लगे हैं. दूसरे राज्यों में जाने के लिए सबसे सुविधाजनक रेलगाड़ी ही रहती है, लेकिन लंबी दूरी की गाड़ियों की कमी के कारण अन्य राज्यों तथा शहरों में काम पर लौटने में लोगों को काफी मशक्कत […]

सीजन में बढ़ता है राजस्व: कृषि प्रधान जिला होने के कारण रोजगार के लिए लोगों को प्राय: अन्य प्रदेश व बड़े शहरों में ही शरण लेना पड़ता है. ये परदेसी पर्व व उत्सव के सीजन में अपने घर आते हैं. जिससे सीजन के दौरान रेलवे को राजस्व की वृद्धि होती है.
वर्तमान में सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन से भी रेलवे को करीब 50 फीसदी राजस्व की वृद्धि हुई है. सामान्य दिनों की तुलना में वर्तमान में 12 सौ टिकट अन्य प्रदेशों के लिए तथा आठ सौ टिकट सवारी गाड़ियों के लिए खरीदी जा रही है.जिससे राजस्व में करीब एक लाख साठ हजार की बढ़ोतरी दर्ज हो रही है.
होली के साथ ही अन्य पर्व के दौरान दो से तीन महीना पहले आरक्षण श्रेणी की टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है. वेटिंग टिकट लेने पर प्राय: आरक्षण नहीं मिल पाता है. जिससे आने जाने में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. इस दौरान विभिन्न ट्रेनों में भीड़ में काफी इजाफा होता है. लोग किसी तरह भेड़-बकरी की तरह लंबी दूरी की गाड़ियों में सवार हो जाते हैं.
इतना ही नहीं गाड़ियों में चढ़ने के लिए लोग जान जोखिम में डालते हैं. हालांकि इस दौरान सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ
के जवानों को भीड़ पर नियंत्रित करते हुए किसी अप्रिय घटना की संभावना को रोकने का हर संभव प्रयास किया जाता है.