Sheikhpura News (सत्येन्द्र कुमार): बिहार के शेखपुरा जिले में बिना मान्यता और निबंधन (रजिस्ट्रेशन) के अवैध रूप से संचालित होने वाले निजी विद्यालयों के विरुद्ध शिक्षा विभाग अब कड़ा रुख अख्तियार करने जा रहा है. सरकार के स्थापित नियमों के खिलाफ बिना वैध मान्यता के स्कूलों का संचालन पूरी तरह से गैर-कानूनी है. इस पर सख्त रवैया अपनाते हुए शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूल संचालकों को कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है. विभाग ने निर्देश दिया है कि आगामी 10 जून तक हर हाल में ‘ई-संवर्धन’ पोर्टल पर निबंधन करा लिया जाए. जो भी स्कूल इस निर्धारित समय सीमा के बाद भी बिना रजिस्ट्रेशन के चलते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए स्कूल के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी.
इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) से उनके संबंधित क्षेत्रों में बिना निबंधन के चल रहे निजी स्कूलों की पूर्ण विवरणी मांगी गई है. समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने या विभागीय आदेश को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों और संचालकों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 88 निजी मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित हैं, जबकि कई अन्य स्कूल बिना किसी वैध कागजात के ही चलाए जा रहे हैं.
प्राइवेट स्कूल संघ को दी गई सख्त हिदायत, ज्ञान दीप पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी सूचना
इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर समग्र शिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) प्रियंका कुमारी ने बताया कि जिले के निजी विद्यालयों के संगठन के अध्यक्ष और सचिव को इस आदेश के संबंध में विस्तृत जानकारी दे दी गई है. सभी निजी स्कूल संचालकों को स्पष्ट रूप से ‘ई-संवर्धन’ पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने और साथ ही ‘ज्ञान दीप’ पोर्टल पर विद्यालय से जुड़ी सभी आवश्यक सूचनाएं अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. डीपीओ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के विभागीय निर्देशों के आलोक में जिले के सभी निजी स्कूलों के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, जिसके लिए 10 जून 2026 तक की अंतिम तिथि (डेडलाइन) मुकर्रर की गई है.
प्रस्वीकृत प्रमाण पत्र के बिना स्कूल का संचालन आरटीई एक्ट के तहत अवैध
विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि तक किसी भी निजी विद्यालय द्वारा प्रस्वीकृति (मान्यता) के लिए ई-संवर्धन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन नहीं किया जाता है, तो आरटीई एक्ट और बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम में यह साफ प्रावधान है कि कोई भी निजी विद्यालय निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना और सक्षम प्राधिकार से प्रस्वीकृत प्रमाण पत्र (Recognition Certificate) प्राप्त किए बिना न तो स्थापित किया जा सकता है और न ही उसका संचालन किया जा सकता है. नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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