शेखपुरा से सत्येंद्र कुमार की रिपोर्ट
International Yoga Day 2026 : अरियरी प्रखंड के चांदी वृंदावन पहाड़ पर पांच दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया गया है. इस योग शिविर के चौथे दिन शिविर में आए लोगों को संबोधित करते हुए योग प्रशिक्षक रंजीत कुमार ने कहा की योग से शरीर को निरोग बनाए रखने में बड़ी कामयाबी मिलती है. उन्होंने कहा की योग के विभिन्न आसन्नों से शरीर को अलग-अलग फायदे मिलते हैं. वर्तमान समय में डायबिटीज, ह्रदय रोग,पेट संबंधी बीमारियों से ज्यादा से ज्यादा लोग पीड़ित हो रहे हैं वैसे में योग का महत्व दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. डायबिटीज की समस्या को योग के कपाल भारती आसन्न से रोका जा सकता है. उन्होंने कहा की इसी प्रकार से वात रोग, कमर दर्द जैसी परेशानियां योग के अनियमित खान-पान से लोगों में कब्ज की समस्या होती है और इसके कारण लगातार कब्ज के बने रहने पर गैस या वात की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
मंडूकासन आसन्न कर गैस वात पर पाएं नियंत्रण
जिसके कारण व्यक्ति को सिर दर्द ,कमर दर्द ,पैर दर्द, सीने में दर्द जैसी कई समस्याएं होती रहती हैं. अगर आप गैस से परेशान हैं और इसे जड़ से मिटाना चाहते हैं तो नियमित रूप से मंडूकासन आसन्न करें। इस रोग से पेट की सभी मांसपेशियों की मालिश हो जाती है. जिससे पेट संबंधी अधिकांश रोग दूर हो जाते हैं. इससे घुटनों ,पिंडलियों का दर्द दूर हो जाता है.
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500 फीट ऊंची चांदी पहाड़ पर चल रहा योग शिविर
विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में अरियरी प्रखंड के चांदी गांव के समीप 500 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित माता शबरी धाम परिसर में योग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस अवसर पर शिक्षक सुधीर कुमार, शिक्षक गणेश कुमार,सामाजिक कार्यकर्ता विपिन कुमार, डॉ परशुराम सहित अन्य लोग भी इसे सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं.
पर्यटन स्थल के रूप में चांदी पहाड़ को विकसित करने पर जोर
इस मौके पर योग शिविर को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता पिंटू चंद्रवंशी ने चांदी वृंदावन पहाड़ का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान किया. पिंटू चंद्रवंशी ने कहा की योग जीवन का मूल आधार है और यह पहाड़ अपने सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए हैं और योग भारत का पहचान है और इस पहाड़ पर योग शिविर होने से चांदी वृंदावन पहाड़ और माता शबरी धाम को राष्ट्रीय पहचान मिलने में मददगार साबित होगा. ऐसी मान्यता है कि मगध के सम्राट जरासंध महाराज का एक सेनापति का का निवास इस पहाड़ के ऊपर था. पिछले दिनों जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने भी पहाड़ पर आकर इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का आश्वासन दिया.
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