शिवहर में शनिवार को नवविवाहित सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत के माध्यम से अपने पति की लंबी आयु और अखंड सुहाग की कामना की। सुबह से मंदिर और वट वृक्ष के पास महिलाओं की भीड़ जुटी रही.
सोलह श्रृंगार और पारंपरिक पूजा
महिलाओं ने हाथों में मेहंदी रचाई, पूजा सामग्री, फल और मिठाइयों के साथ परंपरागत पूजन किया. वट वृक्ष के चारों ओर रक्षा सूत लपेटकर 108 बार परिक्रमा की गई और यमराज की भी पूजा अर्चना की गई.
सावित्री और सत्यवान की कथा
पंडितों ने नवविवाहित महिलाओं को सावित्री और सत्यवान की कथा सुनाई. पौराणिक कथा अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाने के लिए अपनी बुद्धि, निष्ठा और धैर्य का परिचय दिया. उन्होंने अपने सास-ससुर की आंखें, खोया हुआ राजपाट और बच्चों की मां बनने का वरदान मांगकर सत्यवान को जीवित कराया.
व्रत का महत्व और मान्यता
ज्योेष्ठ अमावस्या, दर्श अमावस्या, शनि जयंती, शनि अमावस्या, सौभाग्य योग और शोभन योग में वट सावित्री व्रत करने से शुभ फल की मान्यता है. इस दिन पितरों के लिए स्नान, दान, तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा भी है.
सदियों पुरानी परंपरा
बरगद के पेड़ की पूजा करने की परंपरा सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही है. सावित्री और सत्यवान की कथा के बाद से ही अखंड सुहाग की कामना के लिए यह व्रत हर वर्ष मनाया जाता है.
शिवहर से मनीष नंदन सिंह की रिपोर्ट
