Sheohar News: अखंड सौभाग्य के प्रतीक वट सावित्री व्रत को लेकर शिवहर के बाजारों में उत्सव का माहौल है. आगामी 16 मई को होने वाली पूजा के लिए सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. बाजारों में बांस की बनी डलिया (दौरी), पंखे, लाल चूड़ियां, सिंदूर और ताजे फलों की जमकर खरीदारी हो रही है. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखद दांपत्य जीवन की कामना करेंगी.
शनि जयंती और सौभाग्य योग का अद्भुत संगम
पंडित वेदप्रकाश शास्त्री के अनुसार, इस बार 16 मई को वट सावित्री व्रत के साथ शनि जयंती का विशेष संयोग बन रहा है. ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को प्रातः 5:11 बजे शुरू होगी और 17 मई की रात 01:30 बजे समाप्त होगी. इस दिन सौभाग्य योग और दोपहर से शोभन योग भी बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. इन शुभ योगों में पूजा और दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
पितृ तर्पण और शनि दोष से मुक्ति का अवसर
इस वर्ष वट सावित्री व्रत के दिन दर्श अमावस्या भी है, जिसमें पितरों के निमित्त स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व है. साथ ही शनि अमावस्या होने के कारण शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित लोगों के लिए उपाय करने का यह श्रेष्ठ दिन है. वट वृक्ष पर 108 बार कच्चा धागा लपेटकर सुहागिनें सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण करेंगी. श्रद्धालुओं के लिए शनिदेव की पूजा और व्रत का दोहरा फल प्राप्त करने का यह उत्तम अवसर है.
शिवहर से मनीष नंदन सिंह की रिपोर्ट
