शिवहर: कचरे से कमाई और जल संरक्षण पर महा-चौपाल, प्लास्टिक के खिलाफ गूंजा 4R का नारा

Sheohar News: शिवहर समाहरणालय में डीएम प्रतिभा रानी की अध्यक्षता में "स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान" का शुभारंभ. कचरा प्रबंधन के लिए 4R सिद्धांत और जल संरक्षण पर विशेष उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित. जानिए खबर विस्तार से…

Sheohar News: विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर शिवहर जिला प्रशासन की ओर से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बहुत बड़ा और दूरगामी संदेश दिया गया है. जिला समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक-सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला के दौरान “स्वच्छ गांव, सुरक्षित जलवायु अभियान” का विधिवत शंखनाद किया गया. जिलाधिकारी (डीएम) प्रतिभा रानी की गरिमामयी अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों, त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों और स्वच्छता से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.

स्वच्छता सरकारी कार्यक्रम नहीं, इसे जीवन का हिस्सा बनाना होगा: डीएम

उन्मुखीकरण कार्यशाला को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने कहा कि स्वच्छता केवल कोई सरकारी औपचारिकता या महज एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे हम सभी को अपने दैनिक जीवन की अनिवार्य शैली का हिस्सा बनाना होगा. उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि जब तक इस मुहिम में ग्रामीण स्तर पर आम जनता की सीधी और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक एक स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ समाज का सपना कभी पूरा नहीं हो सकता. जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और पंचायत प्रतिनिधियों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि वे आगामी पांच दिनों तक लगातार गांव-गांव जाकर सघन जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि कोई भी घर इस मुहिम से अछूता न रहे.

प्लास्टिक कचरे के खात्मे के लिए ‘4R’ और ‘3R’ फॉर्मूला

इस उच्चस्तरीय बैठक में पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए ‘4R’ सिद्धांत पर विशेष जोर दिया गया. विशेषज्ञों द्वारा अधिकारियों को समझाया गया कि वे धरातल पर जाकर लोगों को इंकार (Refuse), कम उपयोग (Reduce), पुनः उपयोग (Reuse) और पुनर्चक्रण (Recycle) के इस अनूठे फॉर्मूले को अपनाने के लिए प्रेरित करें.

इसके साथ ही, गांवों में जल संकट से निपटने और धूसर जल (गंदे पानी) के सही प्रबंधन के लिए ‘3R’ सिद्धांत यानी पानी का कम उपयोग, पुनः उपयोग और जमीन में पुनर्भरण (Groundwater Recharge) करने की विस्तृत तकनीकी जानकारियां साझा की गईं. कार्यशाला में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यदि ग्रामीण इलाकों में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण (वेस्ट मैनेजमेंट) किया जाए, तो इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि इसके जरिए जैविक खाद और रीसाइक्लिंग यूनिट्स लगाकर पंचायतों के लिए आय के नए और मजबूत स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं.

गीले और सूखे कचरे को घरों में ही अलग-अलग रखना अहम कदम

समारोह के दौरान शिवहर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) अविनाश कुणाल ने तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को स्रोत (सोर्स) पर ही यानी घरों के भीतर ही अलग-अलग रखने की नितांत आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कचरे का सही और प्राथमिक वर्गीकरण ही पर्यावरण को दूषित होने से बचाने की दिशा में हमारा पहला और सबसे प्रभावी कदम साबित होगा.

इस महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला के मौके पर विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, सभी प्रखंडों के बीडीओ, अंचलाधिकारी, जिला स्वच्छता कर्मी, जीविका दीदियां और भारी संख्या में मुखिया व वार्ड सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण को अक्षुण्ण रखने का सामूहिक संकल्प लिया.

शिवहर से मनीष नंदन की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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