रासायनिक खेती छोड़ जैविक खेती अपनाएंगे पिपराही के किसान, 3 वर्षों तक आर्थिक सहायता देगी सरकार, कार्यशाला में जुटे अन्नदाता

पिपराही में किसानों को जैविक खेती के फायदे बताए गए. रासायनिक खाद के दुष्परिणामों से जागरूक कर 3 साल तक सरकारी मदद का आश्वासन दिया गया.

शिवहर: पिपराही प्रखंड क्षेत्र के चयनित क्लस्टरों के विभिन्न गांवों में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत सोमवार, 21 सितंबर को एक दिवसीय विशेष कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रखंड कृषि पदाधिकारी कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अन्नदाताओं को रासायनिक खादों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें पर्यावरण-अनुकूल जैविक खेती की ओर प्रेरित करना था. प्रशिक्षण सत्र में क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया.

20-20 किसानों का क्लस्टर बनाकर दी जा रही तकनीकी मदद

कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी (जैविक) ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पीकेवीवाई योजना के अंतर्गत 20-20 किसानों का क्लस्टर (समूह) गठित कर क्षेत्र में जैविक खेती को वृहद स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है. सामूहिक रूप से खेती करने से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, इनपुट प्रबंधन और विपणन में सुगमता होती है.

जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट बनाने का मिला व्यावहारिक ज्ञान

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को घर और प्रक्षेत्र पर ही उपलब्ध संसाधनों से जैविक खाद तैयार करने की वैज्ञानिक व पारंपरिक विधियों का व्यावहारिक ज्ञान दिया. इसमें मुख्य रूप से:

  • देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार करना.
  • केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का उत्पादन.
  • तरल जीवामृत और ठोस घनजीवामृत बनाने की सरल प्रक्रिया.

वैज्ञानिकों ने रेखांकित किया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से खेतों की उर्वरा शक्ति तेजी से घट रही है. जैविक खादों के नियमित प्रयोग से न केवल मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या लौटेगी, बल्कि फसलों की लागत में भी भारी कमी आएगी.

3 वर्षों तक आर्थिक सहायता और बाजार की संभावनाएं

किसानों को योजना के वित्तीय पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि पीकेवीवाई योजना के अंतर्गत क्लस्टर से जुड़े किसानों को लगातार 3 वर्षों तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. यह राशि जैविक आदानों (इनपुट्स) की खरीद, खेतों व उत्पादों के प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) और तैयार फसलों की ब्रांडिंग व पैकेजिंग के लिए दी जाती है. इसके साथ ही आधुनिक बाजार में जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग, मिलने वाले प्रीमियम भाव और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात की असीम संभावनाओं के बारे में भी किसानों का मार्गदर्शन किया गया.

किसानों ने लिया रासायनिक खाद का प्रयोग घटाने का संकल्प

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी व्यावहारिक शंकाओं का कृषि अधिकारियों से समाधान कराया. कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी किसानों ने सामूहिक रूप से अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग धीरे-धीरे कम करने और जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया. इस मौके पर प्रखंड कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार और क्लस्टर से जुड़े दर्जनों प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे.

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By Md.maksud alam

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