एक गलती से खाली हो सकता है बैंक खाता! शिवहर पुलिस ने प्रशिक्षु सिपाहियों को सिखाये साइबर से बचाव के तरीके

शिवहर पुलिस ने नव-नियुक्त प्रशिक्षु सिपाहियों के लिए एक विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सिपाहियों को आधुनिक डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने और साइबर अपराधों को रोकने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है. प्रशिक्षुओं को साइबर अपराधों की पहचान, डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और आम नागरिकों को जागरूक करने के तरीके सिखाए गए.

Sheohar News: शिवहर. पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह के निर्देश पर पुलिस लाइन केंद्र में साइबर मंगलवार के अवसर पर नव-नियुक्त प्रशिक्षु सिपाहियों के लिए साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. साइबर डीएसपी इशानी सिन्हा ने प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को आधुनिक डिजिटल युग की चुनौतियों, साइबर अपराध की रोकथाम और तकनीकी जांच की प्रक्रियाओं की जानकारी दी.

साइबर अपराध से निपटने के लिए खुद जागरूक बनने की सीख

प्रशिक्षण के दौरान साइबर डीएसपी इशानी सिन्हा ने कहा कि साइबर अपराध से बचाव और आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए पुलिसकर्मियों का खुद साइबर जागरूक होना जरूरी है. उन्होंने प्रशिक्षु सिपाहियों से कहा कि पहले वे डिजिटल सुरक्षा की जानकारी हासिल करें और इसके बाद आम लोगों को भी साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताएं.

उन्होंने साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को समझने और तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल से होने वाले अपराधों को पहचानने पर जोर दिया.

डिजिटल साक्ष्य जुटाने के तरीके समझाये

कार्यक्रम में साइबर अपराध की जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य की भूमिका के बारे में प्रशिक्षु सिपाहियों को जानकारी दी गयी. साइबर डीएसपी ने अपराधियों की ओर से तकनीकी माध्यमों के नये प्रयोग को समझने और कानूनी प्रक्रिया के तहत डिजिटल साक्ष्य जुटाने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया.

उन्होंने कहा कि साइबर मामलों की जांच में तकनीकी जानकारी और डिजिटल साक्ष्य काफी महत्वपूर्ण होते हैं. पुलिसकर्मियों को इन प्रक्रियाओं में दक्ष बनाने की जरूरत है.

साइबर फ्रॉड होने पर 1930 और 112 पर करें कॉल

प्रशिक्षण में साइबर फ्रॉड की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षु सिपाहियों को बताया गया कि साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए.

इसके साथ ही आपात स्थिति में डायल 112 का इस्तेमाल करने और आवश्यकतानुसार पुलिस सहायता लेने की जानकारी भी दी गयी. साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराने के बारे में भी बताया गया.

OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की सलाह

साइबर डीएसपी ने प्रशिक्षु सिपाहियों को आम लोगों को जागरूक करते समय कुछ बुनियादी सावधानियों की जानकारी देने को कहा. लोगों को अपना OTP, PIN, पासवर्ड और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह देने पर जोर दिया गया.

साथ ही किसी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने के लिए भी लोगों को जागरूक करने की बात कही गयी.

केवल विश्वसनीय वेबसाइट और ऑनलाइन सेवाओं का करें इस्तेमाल

प्रशिक्षण के दौरान ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने का संदेश दिया गया. प्रशिक्षु सिपाहियों को बताया गया कि आम लोगों को केवल विश्वसनीय और सत्यापित वेबसाइटों का ही उपयोग करने के लिए प्रेरित करें.

अनजान वेबसाइट, संदिग्ध लिंक या किसी अविश्वसनीय डिजिटल माध्यम पर व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी डालने से बचने की सलाह देने को कहा गया.

प्रशिक्षु सिपाहियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर

कार्यक्रम का उद्देश्य नव-नियुक्त प्रशिक्षु सिपाहियों को डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना रहा. साइबर अपराध की रोकथाम, नागरिक जागरूकता और तकनीकी जांच में पुलिस की भूमिका को लेकर प्रशिक्षण दिया गया.

प्रशिक्षण के माध्यम से सिपाहियों को न केवल साइबर अपराध की जांच बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी समझायी गयी.

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लेखक के बारे में

By मनीष नंदन सिंह

मनीष नंदन सिंह बीते 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इनका जनहित से जुड़ी खबरों से गहरा जुड़ाव है और ये स्थानीय व क्षेत्रीय स्तर की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं. मनीष जन-सरोकार के मुद्दों की सटीक और जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

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