शिवहर : जिला के रूप में स्वतंत्र अस्तित्व में आने के करीब 22 वर्षों के बाद भी शिवहर रेल लाइन की सुविधा से नहीं जुड़ सका है. जिसके कारण यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को लेकर अलग थलग पड़ गया है. अति पिछड़े इस जिला की द्रुतगति से विकास की बात रेल तक आते आते ठहर कर रह जाती है. मोतिहारी से शिवहर-सीतामढ़ी 76.3 किलोमीटर रेल निर्माण की स्वीकृति लागत करीब 872 करोड़ है. किंतु आज तक इस रेल लाइन के निर्माण पर विभाग द्वारा फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गयी है.
रेल की सुविधा हो, तो शिवहर काे मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
शिवहर : जिला के रूप में स्वतंत्र अस्तित्व में आने के करीब 22 वर्षों के बाद भी शिवहर रेल लाइन की सुविधा से नहीं जुड़ सका है. जिसके कारण यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को लेकर अलग थलग पड़ गया है. अति पिछड़े इस जिला की द्रुतगति से विकास की बात रेल तक […]

राशि के अभाव में इसकी इसकी अग्रतर प्रक्रिया अधर में है. इसके लिए डीपीआर तैयार किये जाने सर्वे किये जाने आदि की बात समय समय पर सामने आती रही है. किंतु जमीनी स्तर पर निर्माण की दिशा कोई कार्य नहीं हो रहा है. जिसको लेकर जिलावासियों में क्षोभ व्याप्त है. इसके लिए लोग स्थानीय सांसद व केंद्र सरकार को जिम्मेवार मानने लगे है. प्रभात खबर की टीम ने रेल लाइन को लेकर बढ़ती मांग को लेकर रामावतार रामदेव महाविद्यालय के प्रोफेसरों से बात की.
प्राचार्य उमेश नंदन सिंह ने कहा कि रेल के अभाव में शिवहर जिला की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर नहीं बन सकी है. बच्चों की शिक्षा, आम आदमी का जीवन स्तर, आर्थिक पिछड़ेपन में रेल का अभाव कारण बनता जा रहा है. आवागमन की समस्या से लोग आर्थिक दोहन के शिकार होते है. जिले के सर्वांगिण विकास के लिए रेल लाइफ लाइन का काम करेगा. किंतु इस दिशा में अब तक स्थानीय सांसद व केंद्र सरकार की उदासीनता बनी रही है. लोक सभा में शिवहर के रेल का मामला मजबूती से नहीं उठाया जा सका है.
प्रो. सीताराम राय का कहना है कि रेल के अभाव में जिले के व्यापार पर असर पड़ता है. समान की ढ़ुलाई बस के द्वारा की जाती है. जिससे व्यापारियों को अधिक भाड़ा का भुगतान करना पड़ता है. जिसका सीधा प्रभाव आम आदमी के जेब पर पड़ता है.
प्रो. शंभूनाथ पांडेय बताते हैं कि शिवहर के लोगों को बाहर अन्य प्रदेश में जाने आने के लिए सीतामढ़ी, मुजप्फरपुर व मोतिहारी जाकर रेल सुविधा प्राप्त करनी होती है.
ऐसे में बस से सफर कर उक्त स्थानों पर पहुंचना पड़ता है. कभी कभी सड़क मार्ग जाम रहने से लोग ट्रेन मिस कर देते है. वही बाहर से घर लौट रहे लोगों के लिए रात होने की स्थिति में सीतामढ़ी, मोतिहारी या मुजप्फरपुर स्टेशन पर रूकने की लाचारी बनी रहती है. कारण कि रात में बस सेवा भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में लोग बाहर के स्टेशनों पर रूकते है. जिससे खाने,पीने व रहने का अतिरिक्त खर्च उन्हें वहन करना पड़ता है.
प्रो नवल किशोर शाही का कहना है कि व्यवसायिक दृष्टिकोण से रेल का अभाव हलकान कर रहा है. अन्य जिले से खाद बीज बस के द्वारा शिवहर लाया जाता है. जिसका सीधा प्रभाव किसानों के कोठी में रखे अनाज पर पड़ता है.
प्रो. शमीम का कहना है कि रेल के अभाव में मेडिकल सुविधा प्रभावित होती है. बाहर जाकर मरीज को देखाने के लिए बस का सहारा लेना पड़ता है. जिससे मरीज को परेशानी होती है. वही अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है. प्रो. शमीम का कहना है कि रेल सेवा से शिवहर राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ेगा. जिससे, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में इसका विकास होगा. रेल लाइन हो जाने से उद्योग धंधों का भी विकास होगा. कहा कि मुजप्फरपुर से शिवहर होकर बैरगनिया तक भी रेल लाइन जाना चाहिए. इससे शिवहर सीधा नेपाल से भी जुड़ सकेगा. इससे शिवहर के विकास का रास्ता खुलेगा.
प्रो. दयाशंकर चौधरी ने कहा कि रेल से आम आदमी के विकास का रास्ता खुलेगा. लोगों को इस ओर ध्यान देना चाहिए. प्रो. जयप्रकाश सिंह का कहना है कि सांसद को इस ओर पहल करनी चाहिए. वही केंद्र सरकार को शिवहर के प्रति सकारात्मक रूख अपनाना चाहिए. रेलवे आरक्षण केंद्र खुलने से लोगों को लाभ मिल रहा है.
प्रो. जीनत अहमद का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षित यात्रा के लिए जिले को रेल से जोड़ना जरूरी है. प्रो. रामाधार राय , अशोक शाही का कहना है कि जिले के सर्वांगिण विकास के लिए रेल आवश्यक है.
बोले आरआर कॉलेज के प्रोफेसर, जिम्मेवार हैं सांसद व केंद्र सरकार
विकास के िलए रेलवे से शिवहर काे जोड़ना जरूरी