कवि सम्मेलन सह मुशायरा में ठंड में हुआ गर्मी का एहसास
प्रो. हरी की रचना ने ग्रामीण श्रोताओं का खूब किया मनोरंजन
विद्यापतिनगर : सुदूर गांव पर लिखी गयी प्रो. हरी नारायण सिंह हरी की रचना सुन गांव के श्रोता बाग बाग हो गये़ ग्रामीण महता को रेखांकित करती उनकी रचना व बोल लोगों को गौरवान्वित किया़ सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए हरी ने अपनी रचना सुंदर चहकत सोन चिरइया हम्मर गांव, सुनाया तो कड़ाके की ठंड भी खुशनुमा माहौल में बदल गयी़
मौका था बाजिदपुर के उमवि में मकर संक्रांति पर आयोजित कवि सम्मेलन सह मुशायरा का़ कवि सम्मेलन का उद्घाटन बिहार प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह ने किया़ मौके पर कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है़ जो समाज की दशा को दिशा देकर उसके विकास में सहायक होती है़ आयोजन स्थानीय कलमकार संसद के तत्वावधान में किया गया़
इस अवसर पर मुखिया संघ के अध्यक्ष दिनेश प्रसाद सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य के सृजन के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए़ युवा कवि मेराज रजा ने में विद्यालय के बदल रहे तसवीर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय बन गया है भोजनालय,नेहरु, दिनकर, कलाम कहां से लाओगे़ कूचले जाते हों जहां शिक्षा के पहरेदार, उस मुल्क को कैसे बचाओगे़ ऐसे भाव को सुन श्रोताओं ने इसे सराहा़ कवि सम्मेलन को बेबसराही, बेलगाम बाजिदपुरी, शयूम जावेद,आचार्य लक्ष्मीदास,उमेश कुंवर कवि, गणेश गिरी कवि, अब्दुल मोबिन, नवल किशोर नवल, अनंत कुमार, राम सागर सिंह, प्रभाकर कुमार, फिरोज आलम, डाॅ. गगनदेव चौधरी ने अपनी कविता से सुशोभित किया़ संचालन कवि शयूम जावेद व धन्यवाद ज्ञापन डाॅ विश्वनाथ सिंह ने किया़
