वैष्णवी तरीके से होती मां की पूजा

दुर्गापूजा कलश शोभायात्रा में शामिल होती हैं 21 हजार कन्याएं सुरसंड : स्थानीय बाबा गरीब स्थान मंदिर परिसर में पिछले 70 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती आ रही है. पूजा समिति का कहना है कि उत्तर बिहार में 84 कोस के अंदर सुरसंड में वैष्णवी तरीके से मां की पूजा […]

दुर्गापूजा कलश शोभायात्रा में शामिल होती हैं 21 हजार कन्याएं

सुरसंड : स्थानीय बाबा गरीब स्थान मंदिर परिसर में पिछले 70 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती आ रही है. पूजा समिति का कहना है कि उत्तर बिहार में 84 कोस के अंदर सुरसंड में वैष्णवी तरीके से मां की पूजा की जाती है. यहां की पूजा कितनी भव्य होती है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिमा विसर्जन जुलूस में करीब दो लाख लोग शामिल होते हैं. विसर्जन के दौरान की भीड़ पुरी की रथ यात्रा की याद दिलाती है. यहां की पूजा कौमी एकता की एक बड़ी मिसाल मानी जाती है. एक और खास बात कि कलश शोभायात्रा में 21 हजार कन्याएं शामिल होती है.
नौ रथों पर मां दुर्गा के नौ रूपों की झांकी धरती पर देवी के अवतरण जैसा लगता है. कुंवारी कन्याओं को बैठा कर एक साथ अल्पाहार कराया जाता है. बाजार की सड़कों पर बनायी जाने वाली रंगोली देखते बनती है. सप्तमी से नवमी तक महिलाएं मां की खोइछा भरती है. गत वर्ष खोइछा में महिलाओं द्वारा दिया गया एक-एक मुट्ठी चावल 57 क्विंटल हो गया था. सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष मिथिलेश राणा बतातें हैं कि वर्ष 1947 में यहां के राम व लक्ष्मण दोनों भाई ने मिल कर मां दुर्गा की पूजा शुरू की थी.
तब से हीं प्रतिमा स्थापित कर पूजा की परंपरा चली आ रही है. गत वर्ष पूजा पर 18 लाख रूपये खर्च हुये थे. समिति के अध्यक्ष रामरतन दास क्रमश: बिंदेश्वर प्रसाद, जीवछ पासवान, अशोक कुमार चौधरी, मनोज कुमार व्याहुत, मुकेश राय, शोभित राउत, राकेश तिवारी व कृष्ण कुमार सरावगी समेत अन्य लोगों की मदद से हर वर्ष सफलता पूर्वक मां की पूजा करते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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