Satyadev Super Speciality Hospital: बेगूसराय जिले के बलहपुर निवासी दो वर्षीय राकेश रंजन को जन्म से ही यूरेटर (मूत्र नली) के संकरे होने की गंभीर समस्या थी, जिसके कारण उसे पेशाब करने में लगातार दिक्कत होती थी. इस समस्या की वजह से बच्चे को बार-बार पेट में दर्द रहता था और धीरे-धीरे इसका असर उसकी किडनी पर भी पड़ने लगा था. इसके बाद परिजन उसे सत्यदेव सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ले गए.
हॉस्पिटल के डायरेक्टर और वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन के अनुसार यूरेटर के संकरे होने के कारण किडनी से मूत्र सही तरीके से नीचे नहीं जा पा रहा था. परिणामस्वरूप पेशाब किडनी की ओर ही वापस लौटने लगा, जिसे चिकित्सकीय भाषा में बैक फ्लो कहा जाता है. लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी को स्थायी नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है. बच्चे की जांच के बाद उन्होंने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का निर्णय लिया. इस आधुनिक तकनीक में छोटे-छोटे चीरे के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है, जिससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है.
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने यूरेटर के संकरे हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया और फिर मूत्र नली को दोबारा जोड़कर उसका रास्ता सामान्य कर दिया. ऑपरेशन सफल रहा और सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति स्थिर बताई जा रही है. अब उसकी किडनी से मूत्र सामान्य रूप से नीचे की ओर जा रहा है.
डॉक्टरों ने बताया कि जन्मजात यूरेटर संकरा होना बच्चों में होने वाली एक गंभीर समस्या है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. ऐसे में यदि बच्चों में पेशाब करने में दिक्कत, पेट में लगातार दर्द या बार-बार संक्रमण जैसी शिकायतें दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए.
सफल सर्जरी के बाद बच्चे के परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया. डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से अब इस तरह की जटिल समस्याओं का इलाज भी सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संभव हो रहा है.
