बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा आज, शहर से गांव तक उत्साह का माहौल

विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ शुक्रवार को की जायेगी

पूजा पंडाल बनकर तैयार, प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे कारीगर

पूजा सामग्री व प्रतिमाओं की खरीदारी से गुलजार रहे बाजार

फोटो-5- मां सरस्वती की प्रतिमा को पूजास्थल पर लेकर जाते स्कूली बच्चे.

प्रतिनिधि, सासाराम ग्रामीण

विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ शुक्रवार को की जायेगी. वसंत पंचमी के अवसर पर होने वाली इस पूजा को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. गुरुवार को मां सरस्वती की प्रतिमाओं को मूर्तिकारों द्वारा अंतिम रूप दिया गया. पूजा को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली गयी हैं. सरस्वती पूजा को लेकर छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह का माहौल है. जिला मुख्यालय के चौक-चौराहों से लेकर ग्रामीण इलाकों के टोलों-मुहल्लों में मंडप बनाये गये हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं ने पंडाल सजाये हैं. स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में भी पूजा की तैयारी पूरी कर ली गयी हैं. गुरुवार को शहर की सड़कों पर युवक और छात्र-छात्राएं ठेला व निजी वाहनों पर माता सरस्वती की प्रतिमाएं ले जाते देखे गये. पूजा को लेकर बाजारों में भी रौनक बनी रही. मंडप सजाने, फल और मिठाई की खरीदारी के लिए गुरुवार को बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी. पूजा समिति के अध्यक्ष अमन कुमार ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. शिक्षक पंचम कुमार ने बताया कि पंडाल, मूर्ति और प्रसाद पर हर वर्ष डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च किये जाते हैं.

वसंत ऋतु का स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व

आचार्य निकुंज पांडेय ने बताया कि पंचांग के अनुसार छह ऋतुएं होती हैं, जिनमें बसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है. यह ऋतु फूलों के खिलने और नयी फसल के आने का पर्व है. इस मौसम में सरसों के पीले फूल, आमों के मंजर और चारों ओर हरियाली से वातावरण खुशनुमा हो जाता है. उन्होंने कहा कि वसंत ऋतु का आध्यात्मिक के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व है. इस ऋतु के आगमन से मानव, पशु और पक्षियों में नयी चेतना का संचार होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा मनायी जाती है.

पूजा को लेकर बाजार में सजी दुकानें

सरस्वती पूजा को लेकर बाजार में फल-फूल और पूजा सामग्री की दुकानें सजी रहीं. बैर, केला, सेब, शकरकंद, नारंगी, अंगूर सहित अन्य फलों की बिक्री हुई. छात्र-छात्राएं शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर साज-सज्जा और फलों की दुकानों पर खरीदारी करते दिखे. खास तौर पर बुंदिया और लड्डू तैयार किये गये. पूजा में प्रसाद के रूप में बुंदिया, शीतल प्रसाद और फल चढ़ाये जाते हैं, जिससे इन सामग्रियों की बिक्री बाजार में चरम पर रही. मां सरस्वती की प्रतिमा सजाने के लिए भी दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही.

शुभ मुहुर्त

आचार्य दयाशंकर पांडेय ने बताया कि 23 जनवरी को पूरे दिन पंचमी तिथि है, इसलिए किसी भी समय पूजन किया जा सकता है. हालांकि पूर्वाह्न 11:40 बजे से 12:28 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो सरस्वती पूजा के लिए विशेष शुभ और फलदायी माना गया है. स्थान परिवर्तन के अनुसार समय में कुछ अंतर संभव है.

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Published by: Anurag sharan

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