भारतीय व्रत, उपवास और पूजा भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं. भारत की संस्कृति केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित मान्यताएं भी जुड़ी हैं. भारत के संतों, विद्वानों तथा मनीषियों द्वारा प्रतिपादित व्रत और उपवास सनातन संस्कृति की परंपरा का हिस्सा हैं.
हरतालिका तीज से मिलता है धैर्य और आत्मबल का संदेश
डेहरी डालमियानगर नगर पूजा समिति के आचार्य विनय कुमार मिश्रा उर्फ विनय बाबा ने बताया कि हरतालिका तीज व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसमें समर्पण, प्रेम, त्याग और अनुशासन का संदेश जुड़ा है. यह व्रत महिलाओं को धैर्य, अनुशासन और आत्मबल को मजबूत करने की प्रेरणा देता है तथा संयुक्त परिवार में प्रेम बनाए रखने का प्रेरणा स्रोत है. महिलाएं अखंड व्रत के रूप में उपवास करती हैं और इसे प्रकृति से जुड़ने का भी सरल साधन माना जाता है.
14 सितंबर को मनायी जायेगी हरतालिका तीज
आचार्य विनय बाबा ने बताया कि इस वर्ष तीज व्रत 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जायेगा. ऋषिकेश पंचांग वाराणसी के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 13 सितंबर को प्रातः 07:11 बजे से होकर 14 सितंबर, सोमवार को प्रातः 07:18 बजे तक रहेगा. चित्रा नक्षत्र दिवा 03:16 बजे तक रहेगा. उदया तिथि के आधार पर तीज व्रत 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जायेगा.
शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर करें पूजा
मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की बालू-मिट्टी मिश्रित प्रतिमा स्वयं बनाकर पूजा की जाती है. गंगा जल या किसी नदी, तालाब अथवा कूप से लाये गये जल से मूर्ति का निर्माण कर पवित्र चौकी पर नूतन वस्त्र डालकर स्थापित किया जाता है.
पूजा में इन सामग्रियों का किया जाता है प्रयोग
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा फल, फूल, मिठाई, शमी पत्र, बेलपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, लौंग, इलायची, दूध, दही, घृत, मधु, इत्र, हल्दी और अक्षत आदि से करनी चाहिए. पूजा सामग्री के साथ 16 श्रृंगार की वस्तुएं जैसे काजल, कुमकुम, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां और लाल चुनरी तथा सुहाग की सामग्री भी चढ़ाई जाती है.
पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने वाला व्रत
हरतालिका तीज केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और आरोग्यता प्राप्त होती है तथा मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना
इस दिन महिलाएं सुंदर वस्त्र, गहने और मेहंदी लगाकर पूजा करती हैं. शिव-पार्वती की कथा सुनना और मन में उनका स्मरण करना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. हरतालिका तीज मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनायी जाती है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है.
पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत
सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इसी व्रत के प्रभाव से माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. यही कारण है कि इस व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है.
निर्जला उपवास रखकर भक्ति में लीन रहती हैं व्रती
व्रती महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और दिनभर भक्ति में लीन रहती हैं. पूजा के दौरान विभिन्न प्रदेशों के परंपरागत भोग पूरे मन से शिव-पार्वती को अर्पित किये जाते हैं.
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