Sasaram Historical Places : सासाराम की ऐतिहासिक विरासत में शामिल करपुरवा स्थित प्राचीन हथिया कुआं के दिन अब बहुरने की उम्मीद जगी है. लंबे समय से उपेक्षित पड़े इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की कवायद शुरू हो गयी है.
सोमवार को डीएम दीपक कुमार मिश्रा ने हथिया कुआं का निरीक्षण कर परिसर की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थल की साफ-सफाई कराने के साथ इसे व्यवस्थित और आकर्षक बनाने का निर्देश दिया.
इस कुएं में उतर कर पानी पीते थे शेरशाह के हाथी
बताया जाता है कि हथिया कुआं का निर्माण शेरशाह सूरी के शासनकाल में हाथियों को पानी पिलाने के लिए कराया गया था. कुएं में हाथियों के उतरने के लिए सीढ़ीनुमा ढाल बनायी गयी है. इसके सहारे हाथी आसानी से नीचे उतरकर पानी पीते और फिर बाहर निकल जाते थे. इसी वजह से इसे हथिया कुआं के नाम से जाना जाने लगा.
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Sasaram Historical Places : अतिक्रमण हटाकर संवरेंगे ऐतिहासिक परिसर
निरीक्षण के दौरान डीएम ने कुएं के आसपास उगी घास-पतवार हटाने और गंदे पानी की सफाई कराने का निर्देश दिया. आसपास के क्षेत्र को भी व्यवस्थित करने को कहा गया. साथ ही कुएं के आसपास अतिक्रमण कर कब्जा की गयी जमीन को मुक्त कराने का निर्देश दिया गया है.
प्रशासन की पहल सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित नहीं है. हथिया कुआं को सासाराम की ऐतिहासिक विरासत के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम शुरू किया जा रहा है. संरक्षण और सौंदर्यीकरण के बाद यह स्थल पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन सकता है.
हथिया कुआं के संरक्षण से विरासत को मिलेगी और पहचान
सासाराम का इतिहास शेरशाह सूरी के शासनकाल से गहराई से जुड़ा है. यहां स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. ऐसे में हथिया कुआं के संरक्षण से शहर की ऐतिहासिक विरासत को एक और पहचान मिलने की उम्मीद है. इससे नई पीढ़ी भी शेरशाह काल की स्थापत्य और जल प्रबंधन व्यवस्था से रूबरू हो सकेगी.
