सासाराम सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम ड्यूटी के नए नियम पर भड़के डॉक्टर्स, कर रहें रोस्टर का विरोध, जानें क्या है पूरा मामला

Sasaram Sadar Hospital News: सासाराम सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कार्य की जिम्मेदारी बदलने पर डॉक्टरों में विवाद छिड़ गया है. ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों को हटाकर ओपीडी और इनडोर के चिकित्सकों को नए रोस्टर में शामिल करने पर कई डॉक्टरों ने आपत्ति जताई है. पढ़ें रिपोर्ट.

Sasaram Sadar Hospital News (जितेंद्र कुमार पासवान): रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम स्थित सदर अस्पताल के भीतर से एक बेहद हैरान करने वाली प्रशासनिक और अंदरूनी घमासान की बड़ी खबर सामने आ रही है. सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कार्य की जिम्मेदारी और ड्यूटी लगाने को लेकर विभिन्न विभागों के चिकित्सकों के बीच तीखी असहमति और विवाद पैदा हो गया है. अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी किए गए एक नए और कड़े ड्यूटी रोस्टर के अनुसार, अब पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के बजाय इनडोर एवं ओपीडी (OPD) से जुड़े चिकित्सकों को सौंपी गई है. नया आदेश और रोस्टर जारी होते ही अस्पताल के कई सीनियर और जूनियर डॉक्टरों ने इस नई व्यवस्था पर खुलकर अपनी आपत्ति और नाराजगी जतानी शुरू कर दी है.

गंभीर हादसों को देखते हुए लिया गया बड़ा फैसला, आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की कवायद

सदर अस्पताल के प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पिछले लंबे समय से व्यवस्थाओं को लेकर समीक्षा की जा रही थी. अब तक सदर अस्पताल के मुख्य ट्रॉमा सेंटर (Trauma Center) में तैनात चिकित्सक ही आपातकालीन मामलों के साथ-साथ पोस्टमार्टम कार्य का अतिरिक्त दायित्व भी निभाते थे. लेकिन रोहतास जिले और एनएच पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों, गंभीर चोटों और अन्य हाई-रिस्क क्रिटिकल मामलों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने इस व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है. प्रशासन का साफ मानना है कि ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों को आपातकालीन और गंभीर जीवन रक्षक सेवाओं के लिए हर समय अस्पताल में पूरी तरह उपलब्ध रहना चाहिए, ताकि किसी भी मरीज के इलाज में एक सेकंड की भी देरी या बाधा उत्पन्न न हो.

नियमित कार्यों पर अतिरिक्त दबाव का हवाला, ओपीडी डॉक्टरों ने कहा “पहले की व्यवस्था ही थी सही”

नए जारी सरकारी आदेश के तहत अब इनडोर वार्डों और ओपीडी में नियमित ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों की पारी-वार ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस में निर्धारित की गई है. अस्पताल प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ ओपीडी के डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है. डॉक्टरों का सीधा तर्क है कि पोस्टमार्टम का काम पहले की तरह ही केवल ट्रॉमा सेंटर के विशेषज्ञ चिकित्सकों से ही कराया जाना चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक, बिना किसी पूर्व चर्चा या तैयारी के अचानक रोस्टर में इस तरह का बदलाव करने से उनके नियमित ओपीडी कार्यों और रूटीन चेकअप पर अतिरिक्त मानसिक और काम का दबाव बढ़ेगा, जिससे अस्पताल आने वाले आम मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

मरीज के हित में नहीं बदला जाएगा फैसला, उपाधीक्षक डॉ. आसित रंजन ने दोटूक सुनाया निर्णय

इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद और डॉक्टरों के आंतरिक गतिरोध के संबंध में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (DS) डॉ. आसित रंजन ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है. उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड मीडिया को बताया कि ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बेहद क्रिटिकल और इमरजेंसी मरीज गंभीर हालत में पहुंचते हैं. कई बार मरीजों की स्थिति अत्यंत नाजुक होती है और उन्हें तत्काल ऑन-स्पॉट डॉक्टर के हस्तक्षेप और इलाज की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में किसी भी शव के पोस्टमार्टम के चक्कर में जीवित मरीज की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता है. मरीजों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें त्वरित स्वास्थ्य लाभ देना हमारी सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है.

उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कड़ा कदम केवल और केवल अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसे वापस नहीं लिया जाएगा. फिलहाल अस्पताल के डॉक्टरों के विभिन्न गुटों के बीच इस नए रोस्टर को लेकर लगातार बैठकें और सुगबुगाहट जारी है. अब देखना यह होगा कि डॉक्टरों के इस अंदरूनी विरोध और नाराजगी के बीच सासाराम सदर अस्पताल का यह नया लाइफ-सेविंग नियम धरातल पर किस प्रकार और कितने प्रभावी ढंग से लागू हो पाता है.

Also Read: शेखपुरा पुलिस का ‘ऑपरेशन मुस्कान’: 25 लोगों को वापस मिले उनके खोए हुए मोबाइल

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Aditya Kumar Ravi

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >