SASARAM NEWS(रजनीकांत पांडेय): रोहतास जिले के करगहर प्रखंड मुख्यालय परिसर में गुरुवार को एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहाँ सरकारी तंत्र की कथित बेरुखी और भीषण आर्थिक तंगी से तंग आकर एक बुजुर्ग महिला ने अपने चार मासूम पोता-पोती के साथ प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया. हालांकि, मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों की तत्परता के कारण एक बड़ा अनर्थ होते-होते बच गया और सभी की जान सुरक्षित बचा ली गई.
प्रखंड कार्यालय के सामने जलाई आग, 5 से 7 मिनट तक मची रही अफरा-तफरी
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, करगहर प्रखंड के अमवलिया महादलित टोला की रहने वाली 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुहागिनी कुंवर अपने चार छोटे-छोटे पोता-पोती को लेकर प्रखंड मुख्यालय पहुंची थीं. कार्यालय परिसर के मुख्य द्वार के सामने उन्होंने अचानक आग सुलगाई और खुद के साथ-साथ बच्चों को भी उसमें झोंकने की कोशिश करने लगीं. मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि बुजुर्ग महिला करीब पांच से सात मिनट तक कभी खुद को तो कभी रोते-बिलखते बच्चों को आग की लपटों की ओर धकेलने का प्रयास कर रही थी. इस खौफनाक मंजर को देख परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई. आस-पास मौजूद लोगों ने बिना वक्त गंवाए दौड़कर किसी तरह आग को बुझाया और महिला व चारों बच्चों को सुरक्षित घेरे से बाहर निकाला.
दुखों का पहाड़: करंट से मरा बेटा, सदमे में बहू की गई जान; भूख से तड़प रहे थे मासूम
आग के चंगुल से बचाए जाने के बाद बुजुर्ग सुहागिनी कुंवर ने रोते हुए अपनी जो आपबीती सुनाई, उसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं. बुजुर्ग महिला ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व उनके पुत्र पप्पू की मौत खेत में बिजली के करंट की चपेट में आने से हो गई थी. इस भीषण हादसे के सदमे को उनकी बहू बर्दाश्त नहीं कर सकी और पति की मौत के महज दस दिनों के भीतर ही दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से उसकी भी मौत हो गई. माता-पिता के साए से महरूम होने के बाद इन चारों अनाथ और छोटे बच्चों के लालन-पालन व पेट भरने की पूरी जिम्मेदारी इस 80 वर्षीय बूढ़ी दादी के कमजोर कंधों पर आ गई.
सरकारी सिस्टम पर गंभीर आरोप, पिछले दो साल से काट रही थीं दफ्तरों के चक्कर
पीड़ित सुहागिनी कुंवर का सीधा और गंभीर आरोप है कि बेटे-बहू की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों को सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वे पिछले दो वर्षों से लगातार करगहर प्रखंड कार्यालय का चक्कर काट रही हैं. लेकिन दफ्तर के बाबू और अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और हर बार सिर्फ आश्वासन देकर टाल दिया गया.
बुजुर्ग ने रोते हुए कहा कि घर में दाने-दाने की किल्लत है और जब वे बच्चों को भूख से तड़पता हुआ देखती थीं, तो उनका कलेजा फट जाता था. इसी लाचारी और प्रशासनिक उपेक्षा से पूरी तरह टूटकर वे मजबूरी में मौत को गले लगाने यहां पहुंची थीं.
प्रशासनिक अफसरों के रवैये पर फूटा स्थानीय लोगों का गुस्सा
इस भयावह घटना के बाद प्रखंड मुख्यालय परिसर में मौजूद स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. लोगों ने प्रखंड प्रशासन और वहां तैनात अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और बिजली विभाग व अंचल कार्यालय के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते इस पीड़ित महादलित परिवार को कबीर अंत्येष्टि, पारिवारिक लाभ, बाल सहायता योजना या राशन जैसी बुनियादी सरकारी मदद मिल जाती, तो आज एक बुजुर्ग महिला को अपने मासूम बच्चों के साथ आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर नहीं होना पड़ता.
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