पर्यावरण संरक्षण और प्रखंड को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से मनरेगा के तहत हर वर्ष बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया जाता है. प्रखंड की सभी 12 पंचायतों में करीब 30 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित है. सड़क किनारे, नहर के तटबंध, आहर-पइन, स्कूल-कॉलेज परिसर और सरकारी व गैर सरकारी भूमि सहित सार्वजनिक स्थलों पर फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाते हैं.
पौधे लगाने के बाद बचाना बना बड़ी चुनौती
पौधारोपण के बाद उनकी सुरक्षा और नियमित देखरेख विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष लगाए जाने वाले करीब 12 से 15 फीसदी पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो जाते हैं. भीषण गर्मी, पराली जलाने से निकलने वाली आग, मवेशियों के विचरण और समय पर पर्याप्त सिंचाई व रखरखाव नहीं होने से पौधों को नुकसान पहुंचता है.
पराली की आग और मवेशियों से पौधों को नुकसान
गर्मी के मौसम में खेतों में पराली जलाने के दौरान आग कई बार सड़क किनारे और खेतों की मेड़ पर लगाए गए पौधों तक पहुंच जाती है. इससे पौधे झुलस जाते हैं. वहीं, खुले में मवेशियों के घूमने से भी पौधों को नुकसान पहुंचता है. ऐसे में पौधों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है.
पांच साल तक पौधों की देखरेख का प्रावधान
मनरेगा के तहत लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखरेख के लिए पांच साल तक का प्रावधान है. पंचायत स्तर पर वन पोषक की तैनाती कर पौधों की नियमित देखभाल, खरपतवार की निकाई-गुड़ाई, सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है. गर्मी के दिनों में सिंचाई के लिए कई स्थानों पर पंचायत स्तर से चापाकल भी लगाए गए हैं.
खराब चापाकल से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित
कुछ स्थानों पर चापाकल खराब या बंद पड़े रहने के कारण पौधों को समय पर पानी नहीं मिल पाता है. इसका सीधा असर पौधों के अस्तित्व पर पड़ता है और कई पौधे सूख जाते हैं. मवेशियों से बचाव के लिए पौधों के चारों ओर बांस के गैबियन लगाए जाते हैं. इसके लिए विभाग की ओर से हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. इसके बावजूद कई स्थानों पर गैबियन क्षतिग्रस्त होने या सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहने से पौधों को नुकसान पहुंचता है.
पौधारोपण अभियान की लगातार हो रही मॉनिटरिंग
पौधारोपण अभियान की प्रखंड स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाती है. रोजगार सेवक और विभागीय कर्मी पंचायतों में भ्रमण कर पौधों की स्थिति की जानकारी लेते हैं. मनरेगा के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पुलिस समेत अन्य विभागों और गैर सरकारी स्तर पर भी पौधारोपण कराया जाता है.
सूखे पौधों की जगह दोबारा लगाए जाते हैं पौधे
अधिकारियों के अनुसार विभिन्न कारणों से नष्ट होने वाले पौधों के स्थान पर दोबारा पौधे लगाए जाते हैं. चेनारी प्रखंड में हरियाली बढ़ाने के लिए केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बचाना भी जरूरी है. खासकर गर्मी के मौसम में नियमित सिंचाई, पराली की आग से सुरक्षा और मवेशियों से बचाव की मजबूत व्यवस्था होने पर ही पौधारोपण अभियान का उद्देश्य पूरा हो सकेगा.
