प्याज के बढ़ते दाम से किसानों में उत्साह, बड़े पैमाने पर हो रही खेती

SASARAM NEWS.प्याज के बढ़ते बाजार भाव को देखते हुए किसान इस वर्ष बड़े पैमाने पर प्याज की खेती में जुट गये हैं. प्रगतिशील किसान लाल बाबू सिंह, अर्जुन सिंह, दीनदयाल सिंह सहित अवध नरेश सिंह, रामजग सिंह और सुरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में हरी सब्जियों की तुलना में प्याज, लहसुन और लाल मिर्च के दाम अधिक हैं.

फोटो-6 – प्याज का बिचड़ा उजाड़ते किसान,

प्रतिनिधि, संझौली

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प्याज के बढ़ते बाजार भाव को देखते हुए किसान इस वर्ष बड़े पैमाने पर प्याज की खेती में जुट गये हैं. प्रगतिशील किसान लाल बाबू सिंह, अर्जुन सिंह, दीनदयाल सिंह सहित अवध नरेश सिंह, रामजग सिंह और सुरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में हरी सब्जियों की तुलना में प्याज, लहसुन और लाल मिर्च के दाम अधिक हैं. किसानों ने बताया कि कम उत्पादन के कारण प्याज का बाजार भाव लगातार बढ़ रहा है. पिछले दो वर्षों में प्याज का मूल्य काफी कम था, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था. लेकिन, वर्तमान में प्याज का भाव संतोषजनक है. इसी को देखते हुए इस बार किसान अधिक क्षेत्र में प्याज की खेती कर रहे हैं. किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही प्याज की खेती को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, रोहतास (बिक्रमगंज) के कृषि उद्यान वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार और मृदा वैज्ञानिक डॉ. रमाकांत सिंह ने किसानों को उन्नत तकनीक से खेती करने की सलाह दी है.

प्याज की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी पर दें ध्यान

वैज्ञानिकों ने बताया कि प्याज की खेती के लिए ठंडी से मध्यम जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो, प्याज की खेती के लिए बेहतर मानी जाती है.

उन्नत किस्में और नर्सरी प्रबंधन

प्याज की उन्नत किस्मों में पूसा रेड, नासिक रेड और एग्रीफाउंड लाइट रेड प्रमुख हैं. एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 8 से 10 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. बीज बोने से पहले कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचार करना चाहिए. 6 से 8 सप्ताह में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं.

खेत की तैयारी और खाद प्रबंधन

खेत को दो से तीन बार जुताई कर भुरभुरा बनाना चाहिए. इसके साथ ही 20 से 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए. उर्वरकों में नाइट्रोजन 100 से 120 किलोग्राम, फॉस्फोरस 50 किलोग्राम और पोटाश 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें. नाइट्रोजन की मात्रा दो से तीन बार में देना लाभकारी होता है.

सिंचाई, रोग और कीट प्रबंधन

रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें. सर्दियों में 10 से 12 दिन और गर्मी में सात से आठ दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. कीट प्रबंधन के लिए नीम तेल या स्पिनोसैड का छिड़काव करें. बैंगनी धब्बा रोग की स्थिति में मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग लाभकारी है.

खुदाई, भंडारण और उत्पादन

जब 70 से 80 प्रतिशत पत्तियां गिर जाएं, तब प्याज की खुदाई करनी चाहिए. खुदाई के बाद प्याज को छाया में सुखाकर पत्तियां काट दें और सूखी व हवादार जगह पर भंडारण करें. उन्नत तकनीक अपनाने से किसानों को प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है.

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Author: ANURAG SHARAN

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