Rohtas News : भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार को नासरीगंज प्रखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल रहा और बहनों ने शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की.
शुभ मुहूर्त में बांधी राखी, भाइयों ने लिया बहनों की रक्षा का संकल्प
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहा. इसके बाद सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है. इसके बाद दोपहर 12:22 बजे से दिनभर राखी बांधने का शुभ समय रहा.
रोली-अक्षत से सजी राखी की थाली, आरती उतारकर खिलायी मिठाई
शुभ मुहूर्त में बहनों ने राखी की थाली सजायी. थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक और राखी रखी गयी. बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधी. इसके बाद आरती उतारकर मिठाई खिलायी और भाई की सुख-समृद्धि के साथ अपनी सुरक्षा और सम्मान की कामना की. भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया.
दूर रह रहे भाई-बहनों ने सोशल मीडिया से मनाया पर्व
रक्षाबंधन को लेकर पूरे दिन लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला. जिन बहनों के भाई दूसरे शहरों में रहते हैं या जो बहनें खुद परिवार से दूर हैं, उन्होंने सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं. कई जगह भाई बहन के घर पहुंचे, तो कहीं बहनें अपने मायके पहुंचकर भाइयों की कलाई पर राखी बांधती नजर आयीं.
सुबह से काली मंदिरों में गूंजने लगी घंटियों की आवाज
रक्षाबंधन के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही. सुबह करीब तीन बजे से ही माता के मंदिरों में घंटियों की आवाज सुनाई देने लगी. भक्तों ने मंदिरों में भोग अर्पित कर आरती और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. मंदिरों को आकर्षक झालरों और रोशनी से सजाया गया था. श्रद्धालुओं के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों की भी व्यवस्था की गयी थी.
काली मंदिरों में दिनभर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नगर के उच्च विद्यालय के समीप स्थित काली मंदिर, थाना मोड़ काली मंदिर, बाइपास काली मंदिर के अलावा इटिम्हा काली मंदिर और बलिया काली मंदिर में सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही. पर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक और उत्सवी माहौल बना रहा.
