Rohtas News : तेज बारिश, अंधेरी रात और NH-120 पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच रविवार की देर रात मोथा के पास सड़क पर एक बुजुर्ग महिला बेसुध पड़ी थी. राह से गुजर रहे काराकाट थानाध्यक्ष विवेक कुमार की नजर महिला पर पड़ी. वह कुछ दूर आगे निकल गये, लेकिन मन में उठे सवाल ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. गाड़ी मोड़कर पहुंचे तो महिला बीच सड़क पर अचेत अवस्था में मिली. समय रहते उसे अस्पताल पहुंचाकर थानाध्यक्ष ने उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभायी.
बीच सड़क पर अचेत पड़ी थी महिला, गुजर रहे थे तेज रफ्तार वाहन
बताया जाता है कि थानाध्यक्ष विवेक कुमार रविवार देर रात मुंजी डीहरा गांव से सीआरपीएफ जवान के अंतिम संस्कार में शामिल होकर अपनी निजी गाड़ी से लौट रहे थे. इसी दौरान मोथा के पास उनकी नजर सड़क पर पड़ी महिला पर गयी. बारिश तेज थी और दोनों ओर से भारी वाहनों समेत अन्य वाहन गुजर रहे थे.
कुछ दूर जाकर फिर मोड़ी गाड़ी, सामने दिखा खतरनाक मंजर
थानाध्यक्ष आगे निकल गये, लेकिन उन्हें आशंका हुई कि कहीं सड़क पर कोई हादसा तो नहीं हुआ है. उन्होंने तत्काल अपनी गाड़ी वापस मोड़ी. मौके पर पहुंचने पर देखा कि एक बुजुर्ग महिला बीच सड़क पर अचेत पड़ी थी. उसके शरीर पर हल्की चोट के निशान भी थे.
वाहनों को रुकवाकर महिला को सड़क से हटाया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष ने तत्काल दोनों ओर से आ रहे वाहनों को रुकवाया. इसी दौरान काराकाट अंचलाधिकारी डॉ. रितेश कुमार भी वहां पहुंच गये. दोनों अधिकारियों ने महिला को सुरक्षित सड़क से हटाने की व्यवस्था की.
अपनी निजी गाड़ी से अस्पताल लेकर पहुंचे थानेदार
थानाध्यक्ष विवेक कुमार ने बिना समय गंवाये महिला को अपनी निजी गाड़ी में बैठाया और इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोड़ारी पहुंचाया. इस दौरान चालक राहुल कुमार, अंचलाधिकारी के चालक, पत्रकार अशोक कुमार सिंह और दैनिक भास्कर डिजिटल के अमित कुमार ने भी सहयोग किया.
इलाज के बाद खतरे से बाहर महिला की हालत
सीएचसी काराकाट में महिला का प्राथमिक उपचार किया गया. अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त प्रतीत होती है. फिलहाल उसका इलाज किया गया है और उसकी स्थिति बेहतर है.
अब महिला के परिजनों की तलाश में जुटी पुलिस
थानाध्यक्ष ने महिला की पहचान कराने के लिए आसपास के इलाकों में जानकारी जुटाने और आवश्यक कार्रवाई शुरू करायी है. हालांकि खबर लिखे जाने तक महिला की पहचान नहीं हो सकी थी. पुलिस उसके परिजनों का पता लगाने में जुटी है.
थानेदार आगे बढ़ जाते तो हो सकता था बड़ा हादसा
इस घटना का सबसे अहम पहलू यह रहा कि तेज बारिश और अंधेरे के बीच सड़क पर बेसुध पड़ी महिला किसी भी समय तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ सकती थी. कई वाहन वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने रुककर उसकी मदद नहीं की. थानाध्यक्ष भी पहले आगे निकल गये थे, लेकिन उन्होंने गाड़ी वापस मोड़ दी.
एक गाड़ी आगे निकल गयी थी, लेकिन इंसानियत ने उन्हें वापस लौटा दिया. उस रात पुलिस की वर्दी ने सिर्फ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं निभायी, बल्कि एक अनजान बुजुर्ग महिला के लिए इंसानियत की मिसाल भी पेश की.
