रोहतास के डेहरी प्रखंड की दरिहट पंचायत को प्रस्तावित डेहरी नगर निगम या नगर परिषद में शामिल करने की कवायद के बीच विरोध के स्वर उठने लगे हैं. दरिहट पंचायत की मुखिया शारदा देवी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजकर पंचायत को नगर निगम या नगर परिषद में शामिल नहीं करने की मांग की है. उन्होंने पंचायत की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे पंचायत का दर्जा बरकरार रखने की मांग की है.
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मुखिया ने कहा है कि दरिहट पंचायत की करीब 70 फीसदी आबादी कृषि कार्य से जुड़ी हुई है. पंचायत की लगभग 70 फीसदी भूमि पर खेती होती है. उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे तो इसकी जांच भी करा सकता है. मुखिया ने मांग की है कि जांच कराने के बाद डेहरी डालमियानगर के कार्यपालक पदाधिकारी के पत्रांक 697, दिनांक 20 अगस्त 2026 के तहत दरिहट पंचायत को नगर निगम या नगर परिषद में शामिल करने की मांग को निरस्त किया जाए.
नगर निगम की सीमा बढ़ाने की चल रही कवायद
दरअसल, डेहरी डालमियानगर नगर परिषद का दायरा बढ़ाकर नगर निगम बनाने की कवायद चल रही है. प्रस्तावित नए परिसीमन में आयरकोठा और शेरपुर से दक्षिणी हिस्से को जोड़े जाने की बात सामने आयी है. इसी परिसीमन के तहत दरिहट पंचायत के सभी गांवों को भी नगर निगम के क्षेत्र में शामिल किये जाने की चर्चा है.
इसी बीच पंचायत के लोगों में भी नगर निगम में शामिल किये जाने को लेकर विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि दरिहट अभी पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में लोग कृषि कार्य पर निर्भर हैं.
ग्रामीणों को टैक्स बढ़ने की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि दरिहट पंचायत में कृषि क्षेत्र काफी बड़ा है और निम्न आय वाले परिवारों की भी संख्या अधिक है. नगर निगम में शामिल होने के बाद अलग-अलग तरह के टैक्स और शुल्क का प्रावधान होता है. ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.
ग्रामीण अनिल कुमार सिंह, मजहर हुसैन, अजीत कुमार सिंह और मनोज यादव समेत अन्य लोगों का कहना है कि दरिहट अभी ग्रामीण इलाका है. यह डेहरी से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसे में पंचायत का दर्जा बरकरार रहने से ही यहां के लोगों के हित में होगा.
मुखिया और ग्रामीणों की मांग है कि दरिहट पंचायत की कृषि आधारित स्थिति और यहां रहने वाली आबादी को देखते हुए इसे प्रस्तावित नगर निगम या नगर परिषद की सीमा में शामिल नहीं किया जाए और पंचायत का मौजूदा स्वरूप बरकरार रखा जाए.
