Sasaram News : अगर स्थिति-परिस्थिति अनुकूल रही, तो नगर निगम का चुनाव आगामी नवंबर 2027 में होना है. यानी चुनाव में अभी करीब 14-15 माह का समय शेष है. किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक व्यक्ति के लिए चुनाव की तैयारी के लिहाज से यह समय कम नहीं कहा जा सकता. ऐसे में सासाराम की नगर राजनीति में जनसुराज की सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है.
शहर की समस्याओं को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरा जन सुराज
बरसात के दिनों में शहर की समस्याएं एक बार फिर सामने हैं. नये शहरी बने गांवों में विकास की दरकार है, तो शहर की पुरानी बस्तियों में भी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है. सफाई, जलजमाव, नाली-गली और सड़क जैसी समस्याएं लंबे समय से शहरी राजनीति के प्रमुख मुद्दे रहे हैं. जनसुराज ने भी इन्हीं मुद्दों को लेकर नगर निगम की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ायी है.
हर स्तर के चुनाव में उपस्थिति दर्ज कराने की घोषणा
जनसुराज के संसदीय चुनाव प्रभारी विनोद तिवारी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी हर स्तर के चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी. इससे संकेत साफ है कि आगामी नगर निगम चुनाव में जनसुराज भी मैदान में उतरने की तैयारी में है. इसी रणनीति के तहत 15 सितंबर को जनसुराज की ओर से नगर निगम के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज करायी गयी.
वार्ड स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं से बढ़ेगी चुनौती
निसंदेह राजनीतिक दल होने के नाते जनसुराज के पास संगठित कार्यकर्ता हैं. ऐसे में अपने-अपने वार्ड के क्षत्रप बने और बनने का सपना पालने वाले स्थानीय नेताओं को अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करने पर विचार करना पड़ सकता है. चंद व्यक्तियों के लिए किसी संगठित राजनीतिक संगठन के मुकाबले चुनावी मैदान में उतरकर आगे निकलना आसान नहीं होगा.
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वार्ड चुनाव में स्थानीय समीकरण, मेयर चुनाव पर असर की संभावना
हालांकि, यह भी सच है कि वार्ड का चुनाव घर-घर की राजनीति पर आधारित होता है. यहां स्थानीय पहचान, व्यक्तिगत संपर्क और मतदाताओं से संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वहीं, मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव जनसुराज प्रभावित कर सकता है. पार्टी की संगठित मौजूदगी इन पदों के चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की क्षमता रखती है.
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दलीय राजनीति के प्रयोग की सफलता पर रहेगी नजर
दूसरी ओर, बिहार के नगर निकायों में दलीय राजनीति अभी तक अपनी मजबूत जगह नहीं बना सकी है. ऐसे में नगर निगम चुनाव में जनसुराज का यह प्रयोग कितना सफल होगा, इसका जवाब भविष्य में ही मिलेगा. हालांकि, इस कवायद से पार्टी को प्रत्येक वार्ड में संगठन विस्तार और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता तैयार करने का अवसर जरूर मिल सकता है.
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