Sasaram News : हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन-सह-मुशायरे का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय ने किया. साहित्य और संस्कृति से जुड़े इस आयोजन में कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और सामाजिक व समसामयिक मुद्दों पर सोचने के लिए भी मजबूर किया.
हिंदी हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की संवाहिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय ने कहा कि हिंदी हमारी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की संवाहिका है. देश के अलग-अलग प्रदेशों और संस्कृतियों के लोगों को एक सूत्र में जोड़ने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस सिर्फ एक भाषा के उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की भाषायी विविधता और एकता का प्रतीक भी है. संचार, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है.
हिंदी एकता की मजबूत कड़ी : विवेक कुमार पांडेय
शाहाबाद के समाजसेवी विवेक कुमार पांडेय उर्फ सोनू पांडेय ने कहा कि हिंदी दिवस हमें भाषा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की याद दिलाता है. अनेक भाषाओं और बोलियों वाले देश में हिंदी एकता की मजबूत कड़ी है. उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है और विदेशों में भी इसके अध्ययन एवं प्रचार-प्रसार का दायरा लगातार बढ़ रहा है.
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कवियों और शायरों की रचनाओं पर देर तक बजती रहीं तालियां
हिंदी पर व्याख्यान के बाद कवि सम्मेलन-सह-मुशायरे ने कार्यक्रम में रंग भर दिया. आजमगढ़ से आये मशहूर शायर मो. अहमद आजमी, फतेहपुर की मो. तरन्नुम नाज, हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी, मिर्जापुर के नरसिंह साहसी समेत सरोज कुमार पंकज, मो. अख्तर इमाम अंजुम, मो. तनवीर अख्तर, दशरथ प्रजापति और प्रो. राजबहादुर राय ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं. हास्य-व्यंग्य, शायरी और कविताओं की प्रस्तुतियों पर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे.
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मो. मतीन सासारामी ने किया कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम का संचालन मशहूर शायर मो. मतीन सासारामी ने किया, जबकि अध्यक्षता हिंदी-भोजपुरी के विद्वान डॉ. गुरुचरण सिंह ने की. मौके पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रजनीश उपाध्याय, शिक्षाकर्मी पंकज कुमार समेत अन्य अधिकारी, शिक्षक एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे.
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