सासाराम न्यूज : शहर के तकिया स्थित तिलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रहा श्री शंकर ज्ञान महायज्ञ
सासाराम ग्रामीण.
जीवन में सहनशीलता का बड़ा महत्व है. सहनशीलता एक ऐसा सत्य है, जिससे प्राय: सभी लोगों को अपने जीवनकाल में रू-ब-रू होना पड़ता है. सहनशील होना एक गुण है, जिससे जीवन का वास्तविक विकास होता है. यह बातें शहर के तकिया मुहल्ला स्थित श्री तिलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रहे श्रीशंकर ज्ञान महायज्ञ के दौरान बुधवार को दीनानाथ शास्त्री ने प्रवचन में कहीं. उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में दुख और तनाव हावी है. इसका परिणाम यह है कि लोग थोड़े से कष्टों से शीघ्र घबरा जाते हैं और लोग क्रोधित हो जाते हैं. संत कबीर एक ऐसे संत थे, जो प्राय: शांत व सहनशील बने रहते थे. उन्होंने कहा कि जिसने कभी किसी से लड़ाई-झगड़ा, मार-पीट, गाली-गलौज नहीं की, बल्कि शुद्ध व पवित्र मन से साधना करते हुए संत कबीर ने अपना मत केवल सहनशीलता के बलबूते फैलाया. यदि कबीर सहनशील न बने होते, तो आज भक्तों, संतों एवं कवियों की परंपरा में नहीं रह पाते. इस तरह यह मानना पड़ेगा कि जीवन में सहनशीलता का कितना बड़ा महत्व है. इसीलिए, वे अपने जीवन में प्राय: सफल रहे थे. आवश्यकता इस बात की है कि हम सहनशील बनें, ताकि हमारे कर्म और व्यवहार से किसी को कोई कष्ट नहीं हो. उन्होंने कहा कि सहनशीलता का गुण अभ्यास से सीखा जा सकता है. प्रत्येक कार्य करने की योजना एक सुनिश्चित ढंग से बनाने और उस पर अमल करने से ही सही दिशा में बदलाव संभव है. अच्छे लोगों की संगति, चिंतन व विचारों को शुद्ध बनाये रखने से समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है. मौके पर स्वामी शंकरानंद, अर्जुनानंद, दीनानाथ, धर्मेंद्र कुमार, मुरारी सिंह, सोनू कुमार, डॉ कामेश्वर सिंह, पंकज, राजेश कुमार, महेंद्र सिंह, रामाशीष, प्रेम शंकर राय, कामेश्वर सिंह, चंदन कुमार, प्रकाश कुमार, लोहा सिंह, श्रीनिवास सिंह, शिवनारायण तिवारी, शशि सिंह, विवेक विक्रम, विजय कुमार सहित संत व श्रद्धालु शामिल रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
