Rohtas News : रोहतास उद्योग समूह के पूर्व कर्मचारी और श्रमिक हितों के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने वाले गिरिजानंदन सिंह के निधन पर शनिवार को उद्योग समूह परिसर में शोकसभा आयोजित की गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता समूह के प्रबंधक ए.आर. वर्मा ने की. इस दौरान कर्मचारियों और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की.
86 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
श्रमिक नेता गिरिजा बाबू का करीब 86 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. शोकसभा में उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और श्रमिकों के हित में किये गये संघर्ष को याद किया. वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक श्रमिकों के अधिकार और रोजगार से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया.
फैक्ट्री खुलवाने की लड़ाई में निभाई अहम भूमिका
प्रबंधक ए.आर. वर्मा ने कहा कि गिरिजानंदन सिंह मृदुभाषी और संघर्षशील व्यक्ति थे. श्रमिकों के अधिकारों के लिए उनकी प्रतिबद्धता और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह की फैक्ट्री बंद होने के बाद उसे दोबारा खुलवाने के लिए चली कानूनी लड़ाई में गिरिजानंदन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तीन हजार कर्मचारियों को मिला रोजगार
शोकसभा में बताया गया कि 10 जुलाई 1984 की फैक्ट्री बंदी का मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था. जुलाई 1989 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा की पीठ ने फैक्ट्रियों को पुनः संचालित करने का आदेश दिया था. इसके बाद करीब तीन हजार कर्मचारियों को दोबारा रोजगार मिला था. इस संघर्ष में गिरिजानंदन सिंह के योगदान को विशेष रूप से याद किया गया.
लोगों ने जताया शोक
शोकसभा में सी.आर. घोष, रविमोहन सिन्हा, एम.पी. सिंह, कामेश्वर तिवारी, बलिराम तिवारी, सरोज सिंह, अनुज कुमार, लल्लू सिंह, विजय कुमार सहित कई कर्मचारी और लोग मौजूद थे. सभी ने गिरिजानंदन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की.
