Sasaram News : गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को शहर का एनिकट क्षेत्र 'गणपति बप्पा मोरया' के जयघोष से भक्तिमय हो उठा. विभिन्न पूजा पंडालों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखा. ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालु एनिकट स्थित सोन नदी के तट पर पहुंचे. यहां विधि-विधान से स्नान और पूजा-अर्चना करने के बाद पीतल एवं मिट्टी के कलश में पवित्र जल भरा गया. इसके बाद श्रद्धालु जल लेकर शोभायात्रा के रूप में पूजा पंडालों तक पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गयी. इसके साथ ही चार दिवसीय गणपति महोत्सव का शुभारंभ हुआ.
गणपति कॉलोनी में भंडारे का आयोजन
शहर के गणपति कॉलोनी, तार बंगला मुहल्ले में गणपति सेवा संस्थान की ओर से भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की गयी. प्रसिद्ध समाजसेवी व व्यवसायी पवन सिंह के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने सोन नदी से जलभरी की. इसके बाद पवित्र जल को पूजा स्थल पर लाकर विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. दोपहर दो बजे से प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया.
संस्था के संस्थापक सदस्य सूरज कुमार ने बताया कि गणपति महोत्सव के दौरान लगातार चार दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम चलेगा. उन्होंने श्रद्धालुओं से महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की.
गणेश मंदिर में भी हुई विशेष पूजा-अर्चना
उधर, अनुमंडल कार्यालय के समीप काली मंदिर परिसर स्थित भगवान श्री गणेश मंदिर में भी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान लंबोदर की विशेष पूजा-अर्चना की गयी. श्रद्धालुओं ने गणपति की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.
उक्त दोनों संस्थानों के संस्थापक सदस्य अखिलेश कुमार उर्फ हीरो जी ने कहा कि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा-अनुष्ठान से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा करने की परंपरा है. वे विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजे जाते हैं. भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी विघ्न दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं.
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गणेश जी की प्रतिमा से मिलती है जीवन में सीख
अखिलेश कुमार ने कहा कि गणेश जी का बड़ा मस्तक हमें विवेक और दूरदर्शिता की सीख देता है, जबकि बड़े कान अधिक सुनने तथा छोटी आंखें एकाग्रता का संदेश देती हैं. वरिष्ठ सदस्य पप्पू सिंह ने कहा कि भगवान श्री गणेश का वाहन मूषक है. इससे हमें विनम्रता और छोटे से छोटे जीव के प्रति सम्मान रखने की प्रेरणा मिलती है.
उन्होंने बताया कि गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है. मौके पर संस्था के नीरज कुमार सिंह ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा में अमृत तत्व विद्यमान है. गणपति अथर्वशीर्ष में भी दूर्वांकुर से गणेश पूजा की महिमा का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से दूर्वा अर्पित करने वाले भक्त पर भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है.
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पुरोहित ने कराया विशेष पूजन
इस अवसर पर पुरोहित रजनीकांत पाठक द्वारा विशेष पूजा करायी गयी. मौके पर धनंजय गुप्ता, रितेश गुप्ता, जीतू झा, विवेक कुमार, पप्पू कुमार, संजय शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे.
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