Sasaram News : नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है. पिछले 29 अगस्त को हुई सामान्य बोर्ड की बैठक में नगर क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों, आय-व्यय और ओवरब्रिज पर लगायी गयी तिरंगे लाइट पर खर्च का ब्योरा पार्षदों ने मांगा था. ब्योरा उपलब्ध नहीं कराये जाने के बाद 16 पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया था. पार्षदों द्वारा नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली के विरोध में आवाज उठाये जाने के बाद विकास से वंचित आम लोगों का भी समर्थन मिलने की बात कही जा रही है.
छह माह से सफाई कार्य और सैरात बंदोबस्ती लंबित
पार्षदों का कहना है कि पिछले छह माह से सफाई कार्य और नगर सैरात की बंदोबस्ती नहीं हो पायी है. इसके कारण नगर को राजस्व की भारी क्षति हो रही है. पार्षदों का आरोप है कि दूसरी ओर शहर में विभागीय स्तर पर वसूली कराकर राशि के बंटवारे की स्थिति बनी हुई है.
सफाई निविदा रद्द करने पर पार्षद ने उठाये सवाल
वार्ड संख्या चार के पार्षद चुनमुन कुमार पांडेय ने बताया कि सफाई कार्य के लिए पूर्व में की गयी निविदा को नगर कार्यपालक पदाधिकारी ने स्पष्ट कारण बताये बिना रद्द कर दिया था. इसके बाद नगर प्रशासन ने दो बार शुद्धि पत्र जारी करते हुए निविदा की अंतिम तिथि 10 सितंबर निर्धारित की. इसमें सात एजेंसियों ने निविदा जमा की.
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को निविदा खोलने के दिन ही अचानक इसे रद्द कर दिया गया. उन्होंने इसे नगर प्रशासन की ओर से की गयी घोर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की.
निविदा खोलने के दिन रद्द करने को बताया जांच का विषय
चुनमुन कुमार पांडेय ने कहा कि निविदा प्रक्रिया के दौरान दो बार शुद्धि पत्र जारी कर समय बढ़ाया गया. इसके बाद निविदा खोलने के दिन ही अचानक इसे रद्द कर दिया जाना जांच का विषय है. उन्होंने 15 सितंबर को किये गये रद्दीकरण की पूरी फाइल और नोटशीट के अलावा सफाई निविदा में भाग लेने वाली सभी सात एजेंसियों के टेंडर रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर जांच कराने की मांग की.
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सैरात बंदोबस्ती नहीं कराने का लगाया आरोप
पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर प्रशासन की सैरात बंदोबस्ती कराने की मंशा नहीं है. उनका कहना है कि निविदा होने के बाद विभागीय वसूली बंद हो जायेगी और कार्यालय में बैठे लोगों को व्यक्तिगत लाभ से वंचित होना पड़ेगा. हालांकि, यह आरोप पार्षदों की ओर से लगाया गया है.
उन्होंने बताया कि 14 पार्षदों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन के साथ सोमवार को जिलाधिकारी से मिलकर नगर में हो रही कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की जायेगी.
वार्डों में विकास कार्य नहीं होने का भी आरोप
विनय सिंह, नाजिया खातून, ज्ञांति देवी आदि पार्षदों ने बताया कि अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं दिये जा रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों पर पार्षदों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया.
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बंद स्ट्रीट लाइट और टूटे नाले के स्लैब से परेशानी
इधर, शहर में विकास कार्य प्रभावित होने से नगरवासियों में भी आक्रोश है. नगरवासियों का कहना है कि नगर प्रशासन की ओर से लगातार जनहित से जुड़े मामलों की अनदेखी की जा रही है और विकास कार्यों में शिथिलता बरती जा रही है.
नगर के अधिकांश वार्डों में लगायी गयी स्ट्रीट लाइट पूरी तरह बंद पड़ी हैं. करीब तीन वर्ष पूर्व बनायी गयी गली-नालियां कई जगहों पर उखड़ गयी हैं और नालियों के स्लैब भी टूट गये हैं. इससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. नगरवासियों के अनुसार, रात के अंधेरे में गलियों से गुजरने के दौरान कई बार लोग नाली में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं.
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नगर इओ से संपर्क का प्रयास, मुख्य पार्षद ने जतायी अनभिज्ञता
इस संबंध में नगर इओ ओमप्रकाश सिंह के सरकारी मोबाइल नंबर 9031668807 पर संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
वहीं, सफाई निविदा रद्द किये जाने के संबंध में मुख्य पार्षद शबनम परवीन ने बताया कि किस परिस्थिति में नगर इओ ने सफाई निविदा को रद्द किया है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
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