रोहतास में सरकार की आमद मरहबा, लब्बैक लब्बैक या रसूल अल्लाह'' के नारे से गुंजा शहर

ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर शहर में भव्य जुलूस निकाला गया। लोगों ने नबी-ए-करीम की शिक्षाओं को अपनाने और समाज में अमन-चैन व भाईचारा कायम रखने का संकल्प लिया।

डेहरी. ईद मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर बुधवार को डेहरी शहर में अलग-अलग जगहों से जुलूस निकाला गया. जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इस दौरान "सरकार की आमद मरहबा, लब्बैक लब्बैक या रसूल अल्लाह" के नारों से शहर का माहौल गूंज उठा. जुलूस में शामिल लोगों ने उत्साह के साथ पर्व मनाया और समाज में अमन, भाईचारा तथा सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया.

इस मौके पर लोगों से सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं रहने, बल्कि नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की अपील की गयी. लोगों से प्रेम, शांति और आपसी भाईचारे के साथ रहने तथा समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करने का संकल्प लेने को कहा गया.

नारों का बताया गया अर्थ

समाजसेवी शहनवाज खान ने जुलूस के दौरान लगाए जा रहे नारों का अर्थ बताते हुए कहा कि "सरकार की आमद मरहबा" का भाव पैगंबर मुहम्मद के दुनिया में आगमन पर खुशी जाहिर करने और उनका स्वागत करने से जुड़ा है.

उन्होंने बताया कि "लब्बैक या रसूल अल्लाह" का अर्थ है, "हे अल्लाह के रसूल, मैं हाजिर हूं." उनके अनुसार यह नबी-ए-करीम के प्रति समर्पण और उनकी शिक्षाओं पर चलने की भावना को दर्शाता है.

शहनवाज खान ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी नबी-ए-पाक के पाक किरदार, सच्चाई, सब्र, रहमदिली और इंसानियत की सेवा का संदेश देती है. यह अवसर गरीबों, मजलूमों और जरूरतमंदों की मदद करने तथा समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देता है.

अच्छे आचरण और इंसानियत का दिया संदेश

उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम ने पूरी मानवता को प्रेम, शांति और आपसी सद्भाव का संदेश दिया. उनकी शिक्षाएं किसी के साथ भेदभाव नहीं करने, जरूरतमंदों की मदद करने, बड़ों का सम्मान करने और छोटों से प्रेम करने की सीख देती हैं.

उन्होंने कहा कि अच्छे अखलाक और नेक आचरण मानव जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे में ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर इन शिक्षाओं को अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता होगी.

मतभेद भुलाकर भाईचारे के साथ रहने की अपील

इस अवसर पर सासाराम विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी और संजीवनी एनजीओ के चेयरमैन अरमान खान ने भी लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ रहने की अपील की.

उन्होंने कहा कि समाज में शांति, एकता और सद्भाव का वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने लोगों से जरूरतमंदों की सेवा करने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया.

अरमान खान ने कहा कि नबी-ए-करीम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाकर ही बेहतर, शांतिपूर्ण और इंसानियत से भरपूर समाज का निर्माण किया जा सकता है. ईद मिलादुन्नबी का संदेश भी प्रेम, भाईचारे और मानवता की सेवा को मजबूत करने का है.


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By मुकेश पांडेय

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