सारण के दिघवारा में खाकी का सपना पूरा करने के लिए रोज पसीना बहा रहीं सैकड़ों बेटियां, पुलिस-सेना भर्ती की कर रहीं तैयारी

Saran News: सारण के दिघवारा में सैकड़ों बेटियां बिहार पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रही हैं. रोजाना घंटों अभ्यास कर वे महिला सशक्तिकरण और बदलती सामाजिक सोच की नई मिसाल पेश कर रही हैं.

दिघवारा से अमित की रिपोर्ट
Saran News: सारण जिले के दिघवारा में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जो बदलते समाज और बेटियों के बढ़ते हौसले की नई तस्वीर पेश कर रहा है. कभी घर की चौखट तक सीमित रहने वाली बेटियां अब बिहार पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती होने का सपना लेकर मैदान में घंटों पसीना बहा रही हैं. जयगोविंद उच्च विद्यालय के खेल मैदान में हर सुबह सैकड़ों युवतियां दौड़, लंबी कूद और अन्य शारीरिक अभ्यास कर अपने सपनों को उड़ान देने में जुटी रहती हैं.

खाकी वर्दी और देश सेवा का बढ़ा जुनून

बिहार पुलिस और सेना में भर्ती होकर देश और समाज की सेवा करने का जुनून बेटियों में तेजी से बढ़ रहा है. यही वजह है कि हर दिन कई किलोमीटर का सफर तय कर लड़कियां दिघवारा पहुंचती हैं और घंटों अभ्यास करती हैं. उनका एक ही लक्ष्य है खाकी वर्दी पहनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन करना.

दिघवारा का मैदान बना बेटियों के सपनों का केंद्र

दिघवारा प्रखंड स्थित जयगोविंद उच्च विद्यालय का खेल मैदान इन दिनों बेटियों के सपनों को आकार देने का केंद्र बन गया है. यहां केवल दिघवारा ही नहीं, बल्कि दरियापुर, गड़खा और आसपास के कई प्रखंडों की लड़कियां फिजिकल टेस्ट की तैयारी करने पहुंच रही हैं. सुबह होते ही पूरा मैदान दौड़ती और अभ्यास करती बेटियों से भर जाता है.

हर दिन 3 से 4 घंटे की कड़ी मेहनत

सफलता हासिल करने के लिए ये बेटियां रोजाना तीन से चार घंटे तक कठिन प्रशिक्षण लेती हैं. दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और शारीरिक फिटनेस से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेकर वे भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करती हैं. उनकी मेहनत और समर्पण देखकर हर कोई प्रभावित हो रहा है.

महिला आरक्षण ने बढ़ाया पुलिस सेवा का आकर्षण

बिहार सरकार द्वारा पुलिस भर्ती में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के बाद बेटियों में पुलिस सेवा को लेकर उत्साह काफी बढ़ा है. अब बड़ी संख्या में युवतियां पुलिस और सुरक्षा बलों में करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं. इसका असर दिघवारा के इस मैदान में साफ दिखाई देता है, जहां हर दिन सैकड़ों बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं.

प्रशिक्षकों की मेहनत से मिल रही सफलता

मैदान में छोटू सिंह सहित कई प्रशिक्षक बेटियों को फिजिकल टेस्ट की बारीकियां सिखा रहे हैं. प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और बेटियों की मेहनत का ही परिणाम है कि यहां से तैयारी करने वाली सैकड़ों युवतियां बिहार पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं में चयनित होकर नौकरी ज्वाइन कर चुकी हैं.

बदलती सामाजिक सोच की मिसाल बनीं बेटियां

दौड़ती, छलांग लगाती और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती ये बेटियां समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव की मिसाल हैं. अब परिवार भी बेटियों के सपनों को समर्थन दे रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. इससे बेटियों का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है.

बेटियां ‘हम बेटों से कम नहीं’ का दे रहीं संदेश

प्रशिक्षण ले रही युवतियों का कहना है कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं. यदि उन्हें परिवार और समाज का सहयोग मिले तो वे हर चुनौती का सामना कर सकती हैं. उनका मानना है कि आने वाले समय में उनके कंधों पर भी समाज और देश की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी.

दिघवारा से निकल रही नई प्रेरणा

दिघवारा का यह मैदान केवल भर्ती की तैयारी का केंद्र नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत तस्वीर बन चुका है. यहां पसीना बहा रही बेटियां उन हजारों युवतियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं, जो बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं.

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Published by: Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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