Saran News: (अमित कुमार को रिपोर्ट) सोनपुर-छपरा रेलखंड के बीच स्थित दिघवारा रेलवे स्टेशन आर्थिक और धार्मिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता है। इस स्टेशन से रेलवे को अच्छी आमदनी होती है। आस्था के केंद्र मां अंबिका भवानी मंदिर, आमी जाने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में इसी स्टेशन पर उतरते हैं। इसके बावजूद स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का हाल बेहद खराब है।
दो दर्जन से अधिक ट्रेनों के ठहराव वाले इस स्टेशन पर यात्रियों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। “मुस्कान के साथ रेल यात्रा” का रेलवे का दावा यहां कागजों तक सीमित नजर आता है।
शौचालय और पेयजल की बदहाल व्यवस्था
स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बना शौचालय उपयोग के लायक नहीं है, जबकि प्लेटफॉर्म नंबर दो पर शौचालय और यूरिनल की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में महिला यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार उन्हें आसपास के परिचितों या रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ता है।
दोनों प्लेटफॉर्म पर शौचालय के अभाव में कई जगह अघोषित यूरिनल बन चुके हैं, जिससे स्टेशन परिसर में गंदगी पसरी रहती है। प्लेटफॉर्म नंबर दो की नियमित सफाई नहीं होने से हालात और खराब हो गए हैं। पेयजल स्थलों के आसपास भी गंदगी का अंबार लगा रहता है, जिसके कारण यात्री बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
शाम होते ही प्लेटफॉर्म पर छा जाता है अंधेरा
दिघवारा स्टेशन के दोनों प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। शाम ढलते ही प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो के अंतिम छोर पर अंधेरा पसर जाता है, जिससे यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
स्टेशन पर लगे कई बिजली पोलों के बल्ब खराब पड़े हैं। यात्रियों का कहना है कि कोच इंडिकेटर की सुविधा नहीं होने और पर्याप्त रोशनी के अभाव में ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कत होती है। खासकर पवन एक्सप्रेस, बरौनी-ग्वालियर एक्सप्रेस और बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में सवार होने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
फुटओवर ब्रिज पर भी पर्याप्त रोशनी नहीं होने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुंबई समेत बड़े शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों के पास अधिक सामान रहता है, ऐसे में अंधेरे के कारण कई बार उनका सामान छूट जाता है या वे निर्धारित कोच तक नहीं पहुंच पाते। कई यात्रियों को मोबाइल या टॉर्च की रोशनी के सहारे अपनी बोगी तलाशनी पड़ती है।
शेड और बैठने की व्यवस्था का अभाव
स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के पूर्वी और पश्चिमी छोर का विस्तार तो किया गया है, लेकिन उसी अनुपात में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई। दोनों प्लेटफॉर्म पर शेड का पर्याप्त विस्तार नहीं होने से भीषण गर्मी में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।
इतना ही नहीं, ट्रेनों की उद्घोषणा की आवाज भी सिर्फ शेड के आसपास तक ही सुनाई देती है। प्लेटफॉर्म के अंतिम छोर तक उद्घोषणा नहीं पहुंचने से यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी लेने में परेशानी होती है।
अमृत भारत योजना के बावजूद अधूरी सुविधाएं
हालांकि अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन का चयन होने के बाद कुछ निर्माण कार्य शुरू हुए हैं, लेकिन अब भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है। स्थानीय लोगों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन पर रोशनी, शौचालय, पेयजल, शेड और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।
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