सारण जिले के एकमा प्रखंड क्षेत्र की बलिया पंचायत के बलिया गांव में सरकारी नलकूप कई वर्षों से खराब पड़ा है. नलकूप बंद रहने के कारण किसानों के सामने सिंचाई की गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय स्तर पर लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं कराये जाने से खेती प्रभावित हो रही है.
कभी खेतों की प्यास बुझाता था सरकारी नलकूप
स्थानीय किसानों के अनुसार, गांव में स्थापित सरकारी नलकूप पहले आसपास के खेतों की सिंचाई का प्रमुख साधन था. लेकिन देखरेख के अभाव में इसके उपकरण वर्षों से खराब पड़े हैं. नलकूप के बंद होने से किसानों को अब सिंचाई के लिए दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
निजी पंपसेट से महंगे दाम पर खरीद रहे पानी
सरकारी नलकूप खराब होने के कारण किसानों को निजी पंपसेट मालिकों से महंगे दाम पर पानी लेकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है. इससे खेती की लागत बढ़ गयी है. किसानों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए बढ़ती लागत के बीच खेती करना मुश्किल होता जा रहा है.
खरीफ और रबी फसलों की सिंचाई पर पड़ रहा असर
किसानों ने बताया कि पानी की समस्या का असर खरीफ और रबी दोनों फसलों की सिंचाई पर पड़ रहा है. समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों की पैदावार प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है. ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सरकारी नलकूप को दुरुस्त कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.
अधिकारियों को सौंपा गया सामूहिक लिखित आवेदन
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत की गयी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. इसके बाद थक-हारकर किसानों और ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग, छपरा प्रमंडल को सौंपा है.
मरम्मत नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकारी नलकूप को जल्द दुरुस्त कर जलापूर्ति और सिंचाई व्यवस्था शुरू करायी जाए. किसानों ने कहा है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.
आवेदन सौंपने के दौरान कई किसान रहे मौजूद
लिखित आवेदन सौंपने के दौरान बलिया गांव के हरेन्द्र सिंह, गौरी शंकर शर्मा, संजीत साह, ओमप्रकाश सिंह, अमरजीत कुमार ठाकुर, रजनीश कुमार और आदित्य कुमार समेत दर्जनों किसान व ग्रामीण मौजूद रहे. सभी ने सरकारी नलकूप की जल्द मरम्मत कराकर सिंचाई संकट दूर करने की मांग की.
