छपरा शहर का साहेबगंज चौक इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों में दर्ज है. आजादी के आंदोलन के दौरान यहीं आजाद हिंद फौज के सेना नायकों का भव्य स्वागत हुआ था और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया गया था. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर जिलेभर से पहुंचे लोगों ने इसी चौक पर देश के लिए मर मिटने का प्रण लिया था. लेकिन आज यह ऐतिहासिक स्थल बदहाली और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है.
जलजमाव, अतिक्रमण और जाम से बढ़ी परेशानी
साहेबगंज चौक पर सालभर जलजमाव, अतिक्रमण और सड़क जाम की समस्या बनी रहती है. यह स्थान अब अवैध वाहन स्टैंड का रूप ले चुका है. सड़क पर ई-रिक्शा और अन्य वाहन खड़े रहने से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. लगातार उपेक्षा के कारण चौक की ऐतिहासिक पहचान भी धूमिल होती जा रही है.
नेताजी का स्मारक भी हुआ गायब
कुछ वर्ष पहले तक चौक पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर वाला एक छोटा स्मारक मौजूद था, लेकिन अब वह हट चुका है. उसकी जगह फुटपाथी दुकानों का कब्जा हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के अभाव में नई पीढ़ी इसके गौरवशाली इतिहास से अनजान होती जा रही है.
आजाद हिंद फौज के तीनों कैप्टन पहुंचे थे छपरा
स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले आजाद हिंद फौज के तीनों प्रमुख कैप्टन जनरल शाहनवाज, जनरल ढिल्लन और जनरल सहगल साहेबगंज चौक पहुंचे थे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित मृत्यु के बाद आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी इन नेताओं पर थी. उनके आगमन पर बंगाली समाज और बड़ी संख्या में युवाओं ने जोरदार स्वागत किया था.
भव्य स्मारक की योजना अब भी अधूरी
कुछ वर्ष पहले साहेबगंज चौक को नेताजी सुभाष चंद्र बोस चौक के रूप में विकसित करने, उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने और एक आकर्षक स्मारक बनाने की योजना तैयार की गई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम को प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी. लोगों ने मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण कर इसे पर्यटन और विरासत स्थल के रूप में विकसित किया जाए.
स्थानीय लोग बताते हैं ऐतिहासिक महत्व
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कभी इस इलाके में बंगाली समाज की बड़ी आबादी रहती थी. मान्यता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी एक बार यहां आए थे और डॉक्टर दीनानाथ के यहां ठहरे थे. हालांकि इसके ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. शिक्षाविद डॉ. कश्मीरा सिंह के अनुसार, आजादी के आंदोलन में सक्रिय सारण की वीरांगना स्वर्णलता देवी और उनका परिवार नेताजी के करीबी थे तथा वर्षों तक छपरा में नेताजी की जयंती मनाई जाती रही.
