छपरा. शहर के पीएन सिंह डिग्री कॉलेज की शासी निकाय को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में पटना हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा शासी निकाय को भंग करने वाले आदेश को अवैध करार देते हुए उसे निरस्त कर दिया है. इस फैसले के साथ ही कॉलेज की पुरानी नियमित शासी निकाय फिलहाल बहाल हो गयी है. मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि 11 मई 2023 को जयप्रकाश विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ फारूक अली ने कॉलेज में एक नियमित शासी निकाय का गठन किया था. इसमें तत्कालीन विधायक डॉ सीएन गुप्ता को अध्यक्ष और प्रो हरिवल्लभ मिश्रा को शिक्षक प्रतिनिधि बनाया गया था. विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व की तदर्थ समिति के सचिव रहे सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल को इस नयी निकाय में शामिल नहीं किया गया. इस पर उन्होंने कुलाधिपति से शिकायत की. कुलाधिपति के निर्देश के बाद कुलपति ने 27 जून 2023 को अचानक एक पत्र (पत्रांक 1749) जारी कर नवनिर्मित शासी निकाय को भंग कर दिया. कुलपति के इस फैसले को शिक्षक प्रतिनिधि प्रो हरिवल्लभ मिश्रा ने हाइकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने तर्क दिया कि कुलपति ने जिस शासी निकाय का गठन खुद किया था, उसे बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका दिये आनन-फानन में भंग कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. न्यायाधीश हरीश कुमार की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने माना कि कुलपति का आदेश नियमसंगत नहीं था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है.
प्रतिनिधि, छपरा. शहर के पीएन सिंह डिग्री कॉलेज की शासी निकाय को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में पटना हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा शासी निकाय को भंग करने वाले आदेश को अवैध करार देते हुए उसे निरस्त कर दिया है. इस फैसले के साथ ही कॉलेज की पुरानी नियमित शासी निकाय फिलहाल बहाल हो गयी है. मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि 11 मई 2023 को जयप्रकाश विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ फारूक अली ने कॉलेज में एक नियमित शासी निकाय का गठन किया था. इसमें तत्कालीन विधायक डॉ सीएन गुप्ता को अध्यक्ष और प्रो हरिवल्लभ मिश्रा को शिक्षक प्रतिनिधि बनाया गया था. विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व की तदर्थ समिति के सचिव रहे सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल को इस नयी निकाय में शामिल नहीं किया गया. इस पर उन्होंने कुलाधिपति से शिकायत की. कुलाधिपति के निर्देश के बाद कुलपति ने 27 जून 2023 को अचानक एक पत्र (पत्रांक 1749) जारी कर नवनिर्मित शासी निकाय को भंग कर दिया. कुलपति के इस फैसले को शिक्षक प्रतिनिधि प्रो हरिवल्लभ मिश्रा ने हाइकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश ने तर्क दिया कि कुलपति ने जिस शासी निकाय का गठन खुद किया था, उसे बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका दिये आनन-फानन में भंग कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. न्यायाधीश हरीश कुमार की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने माना कि कुलपति का आदेश नियमसंगत नहीं था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है.
