Bihar State Universities Act 2026 : छपरा में बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रस्ताव को लेकर विरोध की आवाज उठी है. जनता दल यूनाईटेड शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष और जेपीयू के प्राध्यापक डॉ. कमाल अहमद ने प्रस्तावित कानून को लेकर कई सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि नए कानून से विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने बदलाव से पहले शिक्षकों और शिक्षाविदों से व्यापक संवाद की मांग की है.
नए कानून से स्वायत्तता प्रभावित होने की जताई आशंका
डॉ. कमाल अहमद ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इसके लागू होने से विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता समाप्त होने की आशंका है. उनके अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था से उच्च शिक्षा संस्थानों में सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है.
स्नातक शिक्षा को उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने पर सवाल
डॉ. अहमद ने कहा कि स्नातक स्तर की शिक्षा और कॉलेजों को उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने की योजना से विश्वविद्यालयों के पारंपरिक ढांचे पर असर पड़ सकता है. उन्होंने इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई है.
राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकार सीमित होने की बात
डॉ. कमाल अहमद ने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित कानून के लागू होने से राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकार सीमित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से पहले इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा जरूरी है.
1976 के विश्वविद्यालय कानूनों में बदलाव से पहले संवाद की मांग
उन्होंने सरकार से बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले शिक्षकों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों से गंभीर विचार-विमर्श करने की मांग की. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों की राय को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए.
शिक्षकों और कर्मचारियों में आंदोलन की बात
डॉ. अहमद ने कहा कि प्रस्तावित कानून को लेकर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी आंदोलित हैं. उन्होंने इसे सरकार के लिए गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर समय रहते सार्थक संवाद स्थापित किया जाना चाहिए.
सरकार से पुनर्विचार की अपील
डॉ. कमाल अहमद ने सरकार से प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के साथ संवाद करने की अपील की. उनका कहना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी पक्षों की राय लेना जरूरी है.
