शहीद रामजीवन सिंह की स्मृति में फुटबॉल मुकाबला, पेनाल्टी शूटआउट में सारण ने सीवान को 7-6 से हराया

Football Match: शहीद रामजीवन सिंह की याद में आयोजित फुटबॉल मुकाबले में सारण और सीवान की टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला. अंततः पेनाल्टी शूटआउट में सारण की टीम ने 7-6 से जीत हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम की.

Football Match: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद रामजीवन सिंह की स्मृति में मंगलवार को मढ़ौरा हाई स्कूल मैदान में रोमांचक फुटबॉल मुकाबला आयोजित किया गया. सारण और सीवान की टीमों के बीच खेले गये मुकाबले में निर्धारित समय तक दोनों टीमें एक भी गोल नहीं कर सकीं. इसके बाद पेनाल्टी शूटआउट से मैच का फैसला हुआ, जिसमें सारण (छपरा) की टीम ने सीवान को 7-6 से हराकर विजेता ट्रॉफी अपने नाम कर ली.

सारण और सीवान के बीच रहा कड़ा मुकाबला

मैच के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया. निर्धारित समय तक गोल नहीं होने के कारण मुकाबला पेनाल्टी शूटआउट तक पहुंचा. इसमें सारण की टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7-6 से जीत दर्ज की.

मैच समाप्त होने के बाद मुख्य अतिथि एसडीओ निधि राज और डीएसपी सविंदर कुमार दास ने विजेता और उपविजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की. बेहतर प्रदर्शन के लिए सीवान के गोलू और सारण के रितेश कुमार को बेस्ट इलेवन का पुरस्कार दिया गया. वहीं सारण के अविनाश को बेस्ट ट्वेंटी-टू पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

रेफरी की भूमिका तारा बाबू ने निभायी. वहीं वहाब आलम और नौशाद आलम की कमेंट्री ने दर्शकों के बीच मैच का रोमांच बढ़ा दिया.

आयोजन में सहयोग करने वालों को किया सम्मानित

आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले नीरज कुमार, विष्णु गुप्ता, परमात्मा राय, भानू प्रताप सिंह, ब्रजकिशोर सिंह और दिलीप सिंह को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंत में लालबाबू गिरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

इस अवसर पर प्रो. भूपेश प्रसाद, मनिंदर सिंह, ललन जायसवाल समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.

शहादत दिवस पर निकाला गया कैंडिल मार्च

फुटबॉल मैच के समापन के बाद शहीद रामजीवन सिंह के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडिल मार्च निकाला गया. मढ़ौरा हाई स्कूल के मुक्तामंच से एसडीओ निधि राज और डीएसपी सविंदर कुमार दास के नेतृत्व में खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने मार्च निकाला.

कैंडिल मार्च शहीद स्मारक तक पहुंचा, जहां लोगों ने शहीद रामजीवन सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

18 अगस्त 1942 को दी थी शहादत

बताया जाता है कि 18 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मढ़ौरा के लेरुआ गांव निवासी युवा रामजीवन सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी. उनकी शहादत स्वतंत्रता आंदोलन में मढ़ौरा क्षेत्र के योगदान की महत्वपूर्ण याद है.

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By मनोकामना सिंह

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