सोमवार को आयोजित बकरीद को लेकर शनिवार को तैयारियां शबाब पर रहीं. शहर के खनुआ सहित गुदरी, ब्रह्मपूर, जलालपूर, नगरा, कोपा, दिघवारा, मशरक, दरियापुर, एकमा, मांझी, रिविलगंज, दाउदपुर आदि विभिन्न ग्रामीण बाजारों में बकरों की देर शाम तक खरीद फरोख्त चलती रही.
By Prabhat Khabar News Desk | Updated at :
छपरा. सोमवार को आयोजित बकरीद को लेकर शनिवार को तैयारियां शबाब पर रहीं. शहर के खनुआ सहित गुदरी, ब्रह्मपूर, जलालपूर, नगरा, कोपा, दिघवारा, मशरक, दरियापुर, एकमा, मांझी, रिविलगंज, दाउदपुर आदि विभिन्न ग्रामीण बाजारों में बकरों की देर शाम तक खरीद फरोख्त चलती रही. इसके अलावा बाजारों में सेवइयां सहित विभिन्न खाद्य सामग्रियों की खरीद होने से गहमागहमी रही. कपड़े, जूते-चप्पल, साज-सज्जा व सेवईं की दुकानों पर भी काफी भीड़ देखी गई. वहीं कपड़े की दुकानों पर लोगों को कुर्ता-पजामा, शलवार सूट, जिंस, टी-शर्ट आदि की खरीदारी करते देखा गया. त्योहार को लेकर मांग बढ़ने से सामानों की कीमतों में अन्य दिनों की तुलना में उछाल देखा गया. फिर भी लोग खरीदारी करने में जुटे रहे. देर शाम तक बाजार गुलजार रहा.
10 से 70 हजार तक के बिक रहे बकरे
यूं तो बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरा पालने को तरजीह दिया जाता है. ताकि उससे लगाव व प्रेम पैदा हो. तब उसकी कुर्बानी दी जाए. इससे मोह के त्याग की भावना मजबूत होगी. मगर शहरों में जगह के आभाव के कारण जानवर पालने की जगह खरीदारी का चलन बढ़ा है. कुर्बानी के लिए लोग बकरे पालने वालों के घर पहुंचकर भी बकरों की खरीदारी कर रहे. इस साल बकरे की कीमत 10 से 70 हजार रुपये तक पहुंच गई. जिले के करीमचक के मो अरमान आलम ने बताया कि एक माह पूर्व 25 हजार रुपये में बकरे की खरीदारी की थी. वहीं सफदर अली ने बताया कि कुर्बानी के लिए इस वर्ष 20 हजार रुपये में बकरे की खरीदारी की है. खनुआ पर बिक रहे बकरों का रेंज 15 हजार से उपर ही रहा. शाहनवाज आलम ने सलमान नामी कश्मीरी पहाड़ी बकरे को 70 हजार में खरीदा.
कुर्बानी हर एक मालदार मुसलमान पर वाजिब
अहमदरजा वेल्फेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष हाजी आफताब आलम खान ने बताया कि पैगंबर इब्राहिम अलेहिस सलाम को काफी मन्नत के बाद एक पुत्र हुआ. इसके लिए उन्होंने अल्लाह से लंबे समय तक दुआ मांगी थी. उसके बाद उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी के लिए स्वपन आने लगा. जिससे उन्होंने कई दफे कई चीजों की कुर्बानी दिया. जो कबूल नहीं हो सकी. अंत में वे अपने पुत्र इस्माइल अलेहिस सलाम को अल्लाह की राह में कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए. मगर कुर्बानी के दौरान जन्नत से दुंबा पेश किया गया. उसी दिन से हर एक मालदार मुसलमान पर कुर्बानी वाजिब हो गयी. उन्होंने बताया कि बकरीद को कुर्बानी व त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन अपने बच्चे की तरह पाले गए बकरे की कुर्बानी देते हैं. गोश्त रिश्तेदारों, जरूरतमंदों में बांटते हैं.
बकरीद की नमाज का समय
-ईदगाह, सांढा ढाला- 06.00 बजे
-मस्जिद अहले हदीस, खनुआ- 06.00 बजे
-रिजविया जामा मस्जिद, बड़ा तेलपा- 06.30 बजे
-काजी जी की मस्जिद दहियावां-07.00 बजे
-मौला मस्जिद, करीम चक-06.00 बजे
-औलिया मस्जिद, राहत रोड-06.30 बजे
-जामा मस्जिद, सलेमपुर- 06.30 बजे
-नूरुदाई मस्जिद शेखटोली- 06.45 बजे
-मुहम्मदी मस्जिद छोटा तेलपा तकिया- 06.30 बजे
-अहले हदीस मस्जिद, छोटा तेलपा- 06.30 बजे
-शिया मस्जिद, दहियावां- 09:00 बजे
-बड़ी मस्जिद नई बाजार- 06.30 बजे
-मस्जिद रजा, क़ुरैशी मुहल्ला- 06.30 बजे
-ईदगाह ब्रह्मपुर- 06.30 बजे
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